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पंचपरगनिया बोलने वाली जनसंख्या | पंचपरगनिया भासा कह’इआ जनसंइखा

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परिचय


पंचपरगनिया बोलने वाली जनसंख्या: पंचपरगनिया भासा झारखंड केर पाँच परगना छेतर’ मेंहेन ब’लल जाने वाला एकटा समरिध आर नामकरा छेतरिअ भासा हेके। इ भासा टा मुइख रूपे सिल्ली, बुंडू, तमाड़, राहे, सोनाहातु, अनगड़ा, अंड़की आर एकर आसपास केर इलाका मेंहेन बेसि भाभे परच’लित आहे। ल’क जिबन, ल’क संसकिरति, ल’कगित, ल’ककाथा आर दएनिक बेब’हार मेंहेन इ भासा टाक दढ़’ परभाव देखे पावाएला।

किंतु एखन तक पंचपरगनिया भासा कह’इआ लग केर बइगानिक आर सरकारी असतर ले इसपस्ट’ जनगनना नि हए आहे । एहे कार’ने पंचपरगनिया भासि लगेक बास्त’विक संइखा निस्चित रूपे बाताएकटा मुसकिल आहे। अलग-अलग बिदुआन आर ख’जि बिदुआन आपन अइधन, जनगनना आंकड़ा आर भासाइ आधारे एकर भिनु-भिनु अनुमान देखाएक क’सिस कइर आहएं।



पंचपरगनिया कह’इआ लगेक जनसंइखा|पंचपरगनिया बोलने वाली जनसंख्या


पंचपरगनिया भासा कह’इआ लगेक संइखाक लेके बिदुआन मेंहेन मतभेद देखे पाउआएला। एकर मुइख् कार’न इहे आहे कि सरकारी जनगनना मेंहेन पंचपरगनिया के आलेदा (स्वतंत्र) भासा केर रूपे सहि ढंग ले देखाल नि जाए आहे। कांहु एके तमड़िया, मगही, भोजपुरी, नागपुरी, सादरी चाहे बांगला केर रूपे देखाल जाए आहे।
भासा पेरेमि आर ख’जि बिदुआन गिला निजेक अइधन आर अनुभव केर आधारे पंचपरगनिया भासि लगेक संइखा बाताएक चेस्टा कइर आहएँ।



डाॅ. करम चन्द्र अहीर जि केर मत


डाॅ. करम चन्द्र अहीर जि केर अनुजाइ पंचपरगनिया कह’इआ लगेक जनसंइखा लगभग 10,00,000 (दस लाख) आहे। इमन केर मानना आहे कि पंचपरगनिया भासा झारखंड केर ढेइर इलाका मेंहेन बेआपक रूपे कहल जाएला, किंतु सरकारी अस्तरे एकर सही गनना नि करल जाए आहे।



प्रो. परमानंद महतो जि केर मत

महान पंचपरगनिया साहित्यकार प्रो. परमानंद महतो जि आपन पुस्तक “पंचपरगनिया भाषा” मेंहेन 1981 केर जनगणना केर आधारे पंचपरगनिया भासि लगेक संख्या 4,28,430 बाताए आहएँ।
उमनकेर अनुसार सरकारी आँकड़ाएं बास्त’विक स्थिति ले कम आहे, काहेकि ढेइर पंचपरगनिया भासि अपन मातरिभासा केर जाएगाएँ अइन’ भासा अंकित कइर दे आहएं।



डाॅ. सुनीता गुप्ता जि केर मत


डाॅ. सुनीता गुप्ता जि आपन किताब “पंचपरगनिया लोक साहित्य” मेंहेन 1991 केर जनगणना केर आधारे पंचपरगनिया कह’इआ लगेक संख्या 4,62,706 बाताए आहएँ।
उमनकेर अध्ययन पंचपरगनिया लोक साहित्य आर लोक संस्कृति केर आधारे तेआर करल जाए आहे जेटाएं भासाइक छेतर’ केर बिस्तार ले चरचा देखे पाउआएला।



डाॅ. पराग किशोर सिंह जि केर मत


डाॅ. पराग किशोर सिंह जि आपन स’ध परबंध मेंहेन 2001 केर आधारे पंचपरगनिया भासि लगेक संख्या 5,70,832 आर 2011 केर आधारे 6,53,961 बाताए आहएँ।
इ आँकड़ा गिला के देखले पाता चलेला कि पंचपरगनिया भासि लगेक संख्या निरंतर बाढ़ते जातेहे आर इ भासा केर बेब’हार एखन’ बेआपक रूपे करल जाएला।



विद्वानों के मतों का विश्लेषण / बिदुआन केर मतेक बिसलेसन


उपरेक आँकड़ा गिलाएँ मुख्य रूपे सिल्ली, अनगड़ा, सोनाहातु, बुंडु, तमाड़, अंड़की आर राहे परखंड केर आधार मेंहेन तेआर करल जाए आहे। एखन ढेइर इलाका, अनुमंडल आर सीमावर्ती छेतर’ के समुचित रूपे सामिल करना बाकि आहे।


एहे कार’ने वास्तविक पंचपरगनिया भासि लगेक संइखा सरकारी आँकड़ा ले ढेइर बेसि मानल जाएला।
जनगणना केर सम’इए अनेक अधिकारि पंचपरगनिया भासा केर आलेदा (स्वतंत्र) चिन्हाप ले अनजान रह’एँ। किछु जाएगाएँ पंचपरगनिया के भोजपुरी, मगही, नागपुरी, सादरी इआ बांगला केर रूपे दर्ज कइर देल जाए आहे। एहे कार’ने वास्तविक आँकड़ा आर सरकारी आँकड़ा मेंहेन अंतर देखे पाउआएला।


जनगणना में समस्या आर भाषाई भ्रम


पंचपरगनिया भासाक संबंधे सही जानकारी केर अभाव जनगनना मेंहेन सउबले बडे़ जाला हेके। अनेक जनगनना अधिकारि बाहरी छेतर’ ले आव’एँला आर पंचपरगनिया भासा केर आलेदा (स्वतंत्र) चिन्हाप के सही ढंग ले बुझे नि पाव’एँला।


किछु पंचपरगनिया भासि अपन मातरिभासा केर जाएगाएँ “हिंदी”, “नागपुरी”, “मगही”, “सादरी” इआ “भोजपुरी” लिखवाए दे आहएं। एहे कार’ने पंचपरगनिया केर बास्तविक जनसंइख सरकारी अभिलेख मेंहेन कम देखे पाउआएला।


पंचपरगनिया भाषा क्षेत्र

पंचपरगनिया मइख रूपे झारखंड केर पाँच परगना छेतर’ मेंहेन कहल जाएला। एकर परमुख छेतर’ गिला हेके –

  • सिल्ली
  • बुंडु
  • तमाड़
  • राहे
  • सोनाहातु/बांड़दा/बारेन्दा
  • अनगड़ा
  • अंड़की

एकर अलावा सीमावर्ती बंगाल, ओड़िशा आर झारखंड केर ढेइर-ढेइर इलाका मेंहेनउ पंचपरगनिया भासि लग बसल आहएँ।


मिश्रित भाषाई रूप

पंचपरगनिया भासा ढेइर पड़ोसी भासा संग संपर्क मेंहेन रहेक कार’नेे किछु मिसरित रूप’ विकसित ह’ए आहे। जेसन-

  • पंचपरगनिया-उड़िया
  • पंचपरगनिया-बांगला
  • पंचपरगनिया-कुड़मालि/कुरमाली
  • पंचपरगनिया-नागपुरी
  • पंचपरगनिया – सादरी
  • पंचपरगनिया-मुंडारी


इ मेसा’-क’सा भासाइक रूप गिलाक कार’नेे पंचपरगनिया भासि लगेक बास्तविक संइखा आउर बाढ़ेक रहे किंतु नाइ हलक।



जनगनना संबंधि प्रो. परमानंद महतो जि केर बिचार

महान पंचपरगनिया साहित्यकार प्रो. परमानंद महतो जि केर अनुजाइ—


“जनगणना केर धेउ लेकहन ढेइर अधिकारि पाँच परगना मेंहेन उतर बिहार बाटे ले आलएँ। इमन के पंचपरगनियाक संबंधे बिसेस जानकारी नि हएक कार’ने हिंआक भासा के भोजपुरी, मगही चाहे बांगला केर रूप माइन देलएं। एहे कार’ने पंचपरगनिया केर बास्तविक जनसंइखा सही रूपे सामने नि आए पालक।”


इ टाले फरिच हएला कि पंचपरगनिया भासा मेंहेन सरकारी उपेक्खा आर भासाइक भरम आहे।



पंचपरगनिया भाषा का वर्तमान महत्व

एखन पंचपरगनिया भासा इसकुल, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय आर प्रतियोगी परीक्षा तक पंहचि जाए आहे। झारखंड सरकार केर दाराएं एके दितिअ राज भासा केर रूपे माइन’ता मिलल बाद ले इ भासा केर अध्ययन-शोध आर साहित्यिक विकास तेजी ले बाढ़े लाइग आहेे।

लोक साहित्य, लोकगीत, लोककथा, कहानी, कविता, नाटक आर डिजिटल माइधम गिलालउ पंचपरगनिया भासा केर परचार-परसार आर’ तेजि ले आघु बाढ़े लाइग आहे।



सारांश


उपरेक बिबेचन केर आधारे कहल जाए पाराए कि पंचपरगनिया भासा कह’इआ लगेक बास्तविक संइखा सरकारी आँकड़ा ले ढेइर बेसि आहे। भिुन-भिनु बिदुआन केर मत, भासाइक छेतर’ आर मिसरित भासाइ रूप गिलाक आधारे पंचपरगनिया भासि लगेक संइखा एखन लगभग 15-16 लाख ले उपरे मानल जाएला।


अगर पंचपरगनिया-उड़िया, पंचपरगनिया-बांगला, पंचपरगनिया-कुड़मालि, पंचपरगनिया-नागपुरी, पंचपरगनिया-सादरी आर पंचपरगनिया-मुंडारी जेसन मिसरित रूप गिलाकउ सामिल करल जाए, त’ इ संख्या लगभग 17-18 लाख ले उपरे पहुँचे पारेला।

इ रकम पंचपरगनिया झारखंड केर एकटा समरिध, बेआपक आर सांसकिरतिक रूपे नामजागा भासा हेके, जेटाक संरछन, परचार-परसार आर बइगानिक जनगनना बहुत जरूरि आहे।


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