पंचपरगनिया बोलने वाली जातियाँ : परिचय
पंचपरगनिया बोलने वाली जातियाँ केर मतलब इ भासा टाके कह’इआ भिनु-भिनु जाति, समुदाए आर धरम’ के मान’इआ ले आहे। पंचपरगनिया मुइख रूपे झारखंड केर पाँच परगना छेतर’ मेंहेन कहल जाएला, जाहाँ ढेइर रकमेक छटे-बड़े जाति समुदाए हाजार’ साल ले बस’ बास कर’एंला। इ छेतर’ केर सामाजिक, सांसकिरति आर भासागत बिबिधताइ पंचपरगनिया भासा के एकटा मजबुत समपरक’ भासा केर रूपे बिकसित करेक मेंहेन नामजादि भुमिका निभाए आहे।
पाँच परगना छेतर’ मेंहेन एखन’ ढेइर गांव आर एरिआ देखे पावाएला जाहाँ एके परिबार चाहे एके गांव मेंहेन दुइ चाहे दुइ ले बेसि भासाक बेब’हार करल जाएला। अलग-अलग जातिगत भासा रहतकउ सामाजिक संबंध, हाट-बाजार, खेति-बारी, बिहा-मरखि, लकगित, लकनिरित, आर दएनिक बातचित मेंहेन पंचपरगनिया केर बेब’हार सभे काइ कर’एंला।
इ रकम पंचपरगनिया भासा पाँच परगना छेतर’ केर साझा सामाजिक चिन्हाप बइन जाए आहे।
पाँच परगना क्षेत्र में पंचपरगनिया बोलने वाली जातियाँ
पाँच परगना छेतर’ मेंहेन बस’बास कर’इआ अधिकांस जाति समुदाए पंचपरगनिया भासाक बेब’हार कर’एँला। किछु जाइत गिलाक आपन जातिगत भासा एखन’ आहे, किंतु समपरक’ भासाक रूपे सभे जाति समुदाए केर लग एक दसर संग पंचपरगनिया केरे बेब’हार कर’एँला।
इ छेतर’ मेंहेन पंचपरगनिया कह’इआ परमुख जाति गिलाक नाम इ रकम आहे-
- राजपूत
- अहीर
- पाँड़
- घासी
- लोहरा
- तेली
- कुम्हार
- महली
- सूंड़ी
- ब्राह्मण
- गौसांई
- अड़ेया
- नउवा
- मुंडा
- कोइरी
- डोम
- कामार
- कुड़मि
- सोनार
- ठेठरा
- हलुवाई (मोदक)
- माँझी
- केवटा
- बिरहोड़
- चामार
- हाड़ी
- गोंड़
- सराक
- भगत
- तामली
- केसरा
- माल्हार
- खंडित
- मंडल
- जोगी
- बनिया
- धोबी
- रउतिया
- चीक बाड़ाइक
- कायस्थ एमाइन आर’ अइन’ अनेक छटे बड़े जाइत गिला।
इ सभे जाति समुदाए सामाजिक आर सांस्कृतिक रूपे एक.दसर संग जुड़ल आहंए आर पंचपरगनिया भासा इ संबंध टाके आर’ दढ़’ ब’नाएला।
संपर्क भाषा के रूप में पंचपरगनिया
पंचपरगनिया भासा केर सउबले बड़े बिसेसता इटा हेके जे इ भासा टा आदिबासी आर गएर आदिबासी दुइअ समुदाएक बिच समपरक’ भासा केर काम करेला। पाँच परगना छेतर’ मेंहेन किछु जाइत गिलाक आपन जातिगत भासाउ आहे, जेसन –
| जाति | जातिगत भाषा |
| कुड़मि | कुड़मालि |
| मुंडा | मुंडारी |
| उराँव | कुँड़ुख |
| तामली | बंगाली |
| नउवा | उड़िया.प्रभावित बांगला |
| अड़ेया | अड़ेआ |
किंतु जखन इ सभे लोग अइन’ भासा.भासि संग बातचीत कर’एँला तखन पंचपरगनिया केरे बेब’हार कर’एँला। एहे कार’ने पंचपरगनिया सामाजिक मेल-ज’ल बेपार, सांसकिरतिक आदान-परदान आर छेतरिअ एकता केर सक्त’ माइधम बनल आहे।
इ रकम पंचपरगनिया पाँच परगना छेतर’ केर जड़ेक कड़ी केर काम करेला।
पंचपरगनिया क्यों बनी संपर्क भाषा
पंचपरगनिया भासा संपरक’ भासा केर रूपे बिकसित हए केर पेछुए किछु कारन इ रकम आहे –
बहुभासिक छेतर’
एसन अनुमान आहे कि बहुत पुरना सम’इए पाँच परगना छेतर’ मेंहेन किबल जातिगत भासा कहत रहेन किंतु कालकरम मेंहेन मानुस केर दरकार एक जाइत ले दसर जाइत संग संपरक’ करेक दरकार हए लागलक एतब कार’ने एकटा एसन भासा केर निउ हए लागलग जेटा ढेइर जातिगत भासा आर बाहिर ले आल लगेक मिसरन ले रहे। आर जेटा हर भासा समुदाए केर लग बुझे पारे लागलएँ। एहे भासा टाइ एखन अलग-अलग नाम ले हते-हते एखन पंचपरगनिया भासा मेंहेन थापित हए रइ आहे।
हाट-बाजार संसकिरति
बुंडू, तमाड़, सिल्ली, सोनाहातु आर राहे एमाइन छेतर’एँ हाट.बाजार मेंहेन भिनु.भिनु जाति समुदाए केर लोग पंचपरगनिया मेंहेन बातचीत कर’एँला।
सामाजिक मेल-ज’ल
बिहा-सादी, परब-तिहार, खेती-बारी आर गांवेक जिबन मेंहेन पंचपरगनियाक बेब’हार बेसि करल जाएला।
सरलता आर सहजता
इ भासा सरलए सहज आर बेब’हारिक हेकेए एहे कार’ने अलग-अलग समुदाय गिलाउ इके आसानी ले अपनाए आहंए।
जातिगत भाषा भूलते समुदाय
पाँच परगना छेतर’ मेंहेन किछु एसन’ जाइत गिलाउ आहेन जे धीरे-धीरे आपन जातिगत भासा ले दूर हए जाए आहंए आर पंचपरगनियाक बेब’हार बेसि कर’एँला। बिसेस कइर कहन सिल्ली, सोनाहातु, राहे, बुंडू आर तमाड़ केर किछु भाग मेंहेन बस’बास कर’आ मुण्डा आर उराँव समुदाय मेंहेन इ धचर देखे पाउआएला।
ढेइर मुण्डा परिवार एखन मुण्डारी भासा कम कहएँला आर दैनिक जीवन मेंहेन पंचपरगनिया केरे बेसि बेब’हार कर’एँला। एहे स्थिति केर उल्लेख पंचपरगनिया केर प्रसिद्ध गइदकार जोतिलाल माहादानी जी आपन लेख मुण्डा गिला केर छेतर’ धरमपुर मेंहेन क’इ आहंए –
“आपन भासा मुण्डारी के त लगभग भुइल जाए आहंए।”
इ कथन ले फरिच हएला जे पंचपरगनिया धीरे-धीरे अनेक समुदाय गिलाक दएनिक जीवन केर मुइख समपरक’ भासा बनते जातेहे।
पंचपरगनिया बोलने वाले अन्य धर्म समुदाय
पंचपरगनिया किबल हिन्दु समुदाए तके सिमित नेखे। इ भासा टाके मुसलिम, सिख आर किरिस्चन ;ईसाई समुदाय गिलाउ कह’एँला। पाँच परगना छेतर’ मेंहेन बस’बास कर’इआ भिनु-भिनु धरम समुदाय गिला आपन सामाजिक जीवन, बेपार, हाट-बाजार आर दएनिक बातचीत मेंहेन पंचपरगनियाक बेब’हार कर’एँला।
एहे कार’ने पंचपरगनिया भासा धारमिक विविधताक बीच सामाजिक एकता केर माइधम बनल आहे।
पंचपरगनिया भाषी जातियों का सांस्कृतिक योगदान
पाँच परगना छेतर’ केर भिनु.भिनु जाति समुदाए पंचपरगनिया संस्कृति आर लोकसाहित्य के समृद्ध बनाएक मेंहेन महत्वपूर्ण योगदान दे आहंए। पाँच परगना छेतर’ केर भिनु-भिनु जाति पंचपरगनिया संसकिरति आर ल’कसाहित के समरिध बनाएक मेंहेन नामकरा जगदान दे आहएं।
सांसकिरतिक जगदान
- मुंडा समुदाय → करमाए सरहुलए लोकनृत्य
- कुड़मि समुदाय → कृषि संस्कृतिए लोकगीत खेति संसकिरति, लकगित
- महली समुदाय → बाँस ले बनल जिनिस
- लोहरा समुदाय → ल’हा ले बन’इआ जिनिस
- तामली समुदाय → बेपारिक संसकिरति
- अहीर समुदाय → लोकगीत आर पशुपालन संस्कृति ल’कगित आर पसुपालन संसकिरति
इ सभे समुदाय गिलाक साझा योगदान ले पंचपरगनिया लकसंसकिरति समरिध बनल आहे।
हाट-बाजार और पंचपरगनिया भाषा
पाँच परगना छेतर’ केर हाट-बाजार गिला पंचपरगनिया भासाक परचार-परसार केर परमुख माइधम हेके। बुंडु, तमाड़, राहे, सिल्ली, सोनाहातु आर अंड़की केर हाट-बाजार मेंहेन भिनु-भिनु जाति समुदाए केर लग पंचपरगनिया मेंहनेइ गलफ’ कर’एँला।
इ हाट-बाजार गिला किबल बेपारिक केनदर’ ना लागे बलकि सांसकिरतिक आदान-परदान केर नामजागा थान हेके।
आधुनिक समय में पंचपरगनिया
एखन पंचपरगनिया किबल लकजिबन तके सिमित नेखे बलकि इ भासा टा एखन केर आधुनिक माइधम गिलाहुं तेजि ले आघु बाटे बाढ़े लाइग आहे।
आधुनिक उपयोग
- विद्यालय आर महाविद्यालय मेंहेन अइधन
- शोध कार्य आर विश्वविद्यालयीय पाठ्यक्रम
- YouTube आर Facebook सामग्री
- WhatsApp आर Telegram समूह
- डिजिटल लेखन आर ब्लॉग
- लोकगीत आर वीडियो सामग्री
- इ रकम पंचपरगनिया डिजिटल युग मेंहेनउ आपन पहचान मजबूत कइर रइ आहे।
इ रकम पंचपरगनिया डिजिटल युग मेंहेनउ आपन पहचान मजबूत करे लाइग आहे।
पंचपरगनिया भाषा की सामाजिक भूमिका
पंचपरगनिया किबल बातचीत करेक भासा ना लागे, बल्कि पाँच परगना छेतर’ केर सामाजिक, सांसकिरतिक आर जकजिबन केर चिन्हाप हेके। लकगित, लककथा, बिहा गित, खेति संसकिरति, हाट-बाजार, परब-तिहार आर लक परंपरा गिलाक माइधम ले इ भासा टा पीढ़ी दर पीढ़ी आघु बाढ़ते जातेहे।
इ भासा भिनु-भिनु जाति, समुदाए आर धरम केर बिचे सांसकिरतिक समनब’ए केर नामजागा निमुद परसतुत करेला।
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- पंचपरगनिया भाषा परिवार
- पंचपरगनिया बोलने वाली जनसंख्या
- पंचपरगनिया की प्रमुख भाषागत विशेषताएँ
- पंचपरगनिया और कुड़माली में अंतर
- पंचपरगनिया लोक साहित्य
सारांश
उपरेक बिबेचन केर आधारे कहल जाए पाराए कि पंचपरगनिया भासा पाँच परगना छेतर’ मेंहेन बस’इया सभे छटे-बड़े जाइत, आदिबासी आर गैर-आदिबासी समुदाय सहित हिन्दु, मुसलिम, सिख आर इसाई धरम मान’इया ल’गेक समपरक’ भासा हेके।
इ भासा टा किबल बातचित करे केर माइधम ना लागे, बल्कि सामाजिक एकता, सांसकितिक समनब’ए आर लकजिबन केर जिंदा चिन्हाप हेके। पंचपरगनिा भासा भिनु-भिनु जाति समुदाए गिलाके फुल माला गांथल रकम गांइथ राखेला आर पाँच परगना छेतर’ केर साझा संसकिरतिक चिन्हाप केर रूपे थापित हए रइ आहे।
