पंचपरगनिया भाषा, साहित्य एवं अध्ययन सामग्री का डिजिटल मंच 📚 Learn • Research • Preserve Panchpargania

पंचपरगनिया व्याकरण में अब्ब’ए (अव्यय) : परिभाषा, भेद एवं उदाहरण

Spread the love

प्रस्तावना

पंचपरगनिया व्याकरण में अब्ब’ए : कन’ भि भासा केर बेआकरन मेंहेन अब्ब’ए (अव्यय) केर बिसेस महत्त आहे। बाइक के सुस्पष्ट, सरस आर प्रभावशाली ब’नाएक तेहें अब्ब’ए केर बेब’हार करल जाएला। जेसन संइगा (संज्ञा), सरब’नाम, बिसेसन आर किरिआ केर रूप लिंग, बचन, कारक, पुरूस एमाइन केर कार’ने बदलते रहेला, तेसन अब्ब’ए केर रूप मेंहेन कन’ परिबरतन नि ह’एला। एहे कार’ने एके अबिकारि सब्द’उ कहल जाएला।

पंचपरगनिया भासा मेंहेन अब्ब’ए केर बेब’हार अत्यंत व्यापक रूपे ह’एला। दैनिक बातचीत ले कइर कहन साहित्यिक रचना तक अब्ब’ए बाइक केर अरथ’ के स्पष्ट आर प्रभावशाली ब’नाएक काम करेला।


अब्ब’ए केर अरथ’

अब्ब’ए केर साब्दिक अरथ’ हेके— जेटा ब’ए नि ह’ए, एआनि ज’न सब्द’ केर रूपांतर नि ह’एला। उ आपन मूल रूप मेंहेनेइ रहेला आर लिंग, बचन, कारक, पुरूस, काल एमाइन केर कार’ने कन’ बदलाव नि ह’एला।


अब्ब’ए केर परिभासा

कन’ भि भासा केर एसन सब्द’ जेगिलाक रूप लिंग, बचन, कारक, पुरूस चाहे काल केर प्रभाव ले नि बदलेला, उटाके अब्ब’ए कहल जाएला।

प्रो. राम खेलावन राय केर अनुजाइ—

“बाइके आल जन सब्द’ गिलाक रूप लिंग, बचन आर कारक केर अनुजाइ कन’ परिवर्तन नि ह’एला, उके अब्ब’ए कहल जाएला।”

एआनि अब्ब’ए एसन बेआकरनिक सब्दाउलि हेके जेटा बाइक मेंहेन बेब’हार ह’लउ अइन’ सब्दक रकम संरचनात्मक परिवर्तन नि करेला आर आपन मूल रूपे बनल रहेला।


अब्ब’ए केर प्रमुख बिसेसता

अब्ब’ए केर मुख्य बिसेसता इ रकम आहे—

  • एकर रूप मेंहेन परिवर्तन नि ह’एला।
  • इ लिंग, बचन, कारक, पुरूस एमाइन ले प्रभावित नि ह’एला।
  • बाइक केर अरथ’ के स्पष्ट करेला।
  • किरिआ, संइगा चाहे समपुरन बाइक केर बिसेसता बाताएला।
  • बाइक गिलाक बीच संबंध स्थापित करेला।
  • मनुष्य केर मनोभाव प्रकट करेला।

अब्ब’ए केर भेद

पंचपरगनिया भासा मेंहेन अब्ब’ए केर मुख्य रूपे चाइर टा भेद मानल जाएला—


1. किरिआ-बिसेसन अब्ब’ए

जन अबिकारि सब्द’ ले किरिआ केर कन’ बिसेसता जानल जाएला, उटाके किरिआ-बिसेसन अब्ब’ए कहल जाएला।

इ किरिआ केर—

  • काल (सम’इ)
  • इस्थान (जाएगा)
  • रिति (ढंग)
  • परिमान (मात्रा)

संबंधी बिसेसता बताएला।

निमुद

  • डमन दम आँटे कुदलक।
  • गरू गाड़िक चाका टा धिरे-धिरे गुड़क’तेहे।
  • आइज हावा आँटे चल’तेहे।
  • आइज दमे रउद देतेहे।
  • आइज दमे पानि कर’तेहे।

(क) इस्थानबाचक किरिआ-बिसेसन

जन सब्द’ ले किरिआ केर ह’एक जाएगा चाहे इस्थान केर ब’ध ह’ए, उटाके इस्थानबाचक किरिआ-बिसेसन कहल जाएला।

निमुद

हिंआ, हुंआँ, उपर, भितर, बाहिर, इधार, उधार, नेगा, दाहिना, आस-पास, इठिन, उठिन, हाउठिन एमाइन ।

बाइक

  • कुकुर टा हिंआँ का भुक’तेहे।
  • सिआड़ टा हुंआँ का भुक’तेहे।
  • मदना उठिन गिरलक।

(ख) कालबाचक किरिआ-बिसेसन

जन सब्द’ ले किरिआ चाहे काम केर ह’एक सम’इ केर पाता चलेला, उटाके कालबाचक किरिआ-बिसेसन कहल जाएला।

निमुद

एखन, कखन, एबार, आरब’छर, आइज, काइल, सारातखन, तुरूत, राइतभइर, र’जे, ढेइरधं, प’उरसाल एमाइन ।

बाइक

  • मदन दिनभइर हार ज’तलक।
  • सारातखन पढ़ेक ना लागे।
  • तके ढेइरधं देइख आहं।
  • खेदुआ केर काइल परिछा आहे।
  • सिमा एखन पढ़’तेहे।

(ग) परिमानबाचक किरिआ-बिसेसन

जन सब्द’ ले किरिआ केर मात्रा अथवा परिमान केर ब’ध ह’ए, उटाके परिमानबाचक किरिआ-बिसेसन कहल जाएला।

निमुद

बेसि, कम, बड़े, अनठेकान, दमतक, तनिक, एकठ’पा, थड़ेक-आधेक, किछु, एतना, अतना आदि।

बाइक

  • राइते तनिक टाइ खाना खाएक चाहि।
  • खेड़िआ अनठेकान चुड़पेला।
  • स’मरा बड़े खेत के ज’तेला।
  • सिमा निमा के दमतक पिटलक।

(घ) रितिबाचक किरिआ-बिसेसन

जन सब्द’ ले किरिआ केर ह’एक ढंग, रिति अथवा तरीका केर पाता चलेला, उटाके रितिबाचक किरिआ-बिसेसन कहल जाएला।

निमुद

जेसन, तेसन, एकसंगे, फाटाफ’इट, चाँड़े, धिरे-धिरे, आँटे-आँटे, आचाकाएँ, अहेतेहें, रकम, अब’इस’ आदि।

बाइक

  • गाड़िक चाक टा आँटे-आँटे गुड़क’तेहे।
  • बुढ़ा ल’क टा साइकिल धिरे-धिरे चालातेहे।
  • सिमा आचाकाहिं कुआएँ गिरलक।
  • मएँ त’हरेक कामटा अब’इस’ करम।

2. संबंध ब’धक अब्ब’ए

पंचपरगनिया व्याकरण में अब्ब’ए : असन अब्ब’ए जेटा बाइक मेंहेन कन’ संइगा सब्दक बादे ज’ड़ाए कहन अकर संबंध बाइक केर द’सर सब्दक संग जानाएला, उटाके संबंध ब’धक अब्ब’ए कहल जाएला।

प्रमुख संबंध ब’धक

भइर, तक, बिना, आघु, पास, धुर, पहिल, बाद, लगभग, मातर’, कार’ने, जाला, मदद, चलते, आलावा, बदल आदि।

बाइक

  • संदीप राइत भर कांदत रहलक।
  • सुरज राइत भर पढ़त रहलक।
  • मएँ घर तक जाए रहं।
  • उ मर घर पासे रहेला।
  • मानुस पानिक बिना जिअँत नि रहे पारे।
  • मके त’र कार’ने जाए ह’लक।
  • बुंडू केर बादे राँची आहे।

3. समुच’ए ब’धक अब्ब’ए

जन सब्द’ टा दुइ सब्द’, दुइ पद, दुइ बाइक चाहे दुइ बिचार केर संबंध स्थापित करेला, उटाके समुच’ए ब’धक अब्ब’ए कहल जाएला।

निमुद

  • सुमिता हाँसेला आर संदीप काँदेला।
  • सिमा जाइ हले मंएअ’ जाम।
  • तएँ पढ़िं चाहे खाइं।
  • निमा आलक किंतु मर संग भेंट नि करलक।

समुच’ए ब’धक केर भेद

(क) समानअधिकरन

संज’जक

आर, एबंग’

  • निमा आर सिमा दुइअ बहिन हेकएँ।
  • निमा, सिमा एबंग’ बिबेक पढ़े जाए आहएँ।

बिभाजक

चाहे, किंबा, नितर

  • जे.पी.एस.सी. मेंहेन पंचपरगनिया राखिं नितर कुड़मालि राखिं।
  • किताब टाके बिनिता फाइड़ ह’इ चाहे बिबेक फाइड़ ह’इ।

बिर’धदरसक

किंतु, लेकिन, बरंग’

जगदीस आलक किंतु माहाबीर नि आलक।

मएँ किबल पढ़ुआ ना लागं, बरंग’ खिलाड़िअ हेकं।

परिनामदरसक

अहेतेहें, अहेजालाएँ

  • कुनाल केर माएँ अके दमे पिटलक, अहेतेहें कुनाल पारालक।

(ख) बेआधिकरन

कारनबाचक

काहेकि, जे कि

  • कुनाल पारालक काहेकि अकर माएँ अके दमे पिट आहे।

उदेसबाचक

जे, ताकि

  • तके मएँ राँची भेजम ताकि तएँ बेस लेखेर पढ़ाइ करबे।

संकेतबाचक

जे…ते, जदि…त’

  • जे पहिल आइ ते पहिल पाइ।
  • जदि सिमा आइ त’ मएँ जाम।

सरूपबाचक

कि, जे, एआनि

  • बात इटा हेके कि मर पास पइसा नेखे।

4. बिस्म’एआदि ब’धक अब्ब’ए

जन अब्ब’ए ले हर्स’, स’क, घिरना, आसचरज’, दुख, संबोधन, तिरस्कार आदि मनोभाव व्यक्त ह’ए, उटाके बिस्म’एआदि ब’धक अब्ब’ए कहल जाएला।

हर्स’ ब’धक

  • बाह !
  • बाह-बा !
  • साबाइस !

बाइक

  • बाह ! तएँ जे.पी.एस.सी. पास कइर लेले।
  • साबाइस ! त’हरे बहुत बेस काम क’रला।

आसचरज’ ब’धक

  • अह’ !
  • का !

बाइक

  • अह’ ! काम टा ब’गड़’लक।
  • का ! पुरेन केर एकसिडेंट ह’लक।

तिरस्कार ब’धक

  • छि !
  • धेइत !
  • छि-छि !

बाइक

  • छि ! आइज ले एसन काम ना क’रबे।
  • धेइत ! एसन काम ना क’रबा।

सइकार ब’धक

  • हं ठिक !
  • आछा ठिक !
  • बहुत बेस !

संब’धन ब’धक

  • एरे !
  • एह’ !
  • एल’ !

स’क ब’धक

  • हाए-हाए !
  • अहरे !
  • हाए रे !

पंचपरगनिया में प्रचलित प्रमुख अब्ब’ए | पंचपरगनिया व्याकरण में अब्ब’ए

एखन, आइज, काइल, हिंआ, हुंआ, धिरे-धिरे, आँटे-आँटे, आर, चाहे, किंतु, अहेतेहें, काहेकि, हाए-हाए, बाह, छि, एरे आदि।

सारांश

पंचपरगनिया व्याकरण में अब्ब’ए : इ रकम पंचपरगनिया भासा मेंहेन अब्ब’ए (अव्यय) केर ढेइर ढांगा इस्थान आहे। अब्ब’ए असन अबिकारि सब्द’ हेके जेगिलाक रूप लिंग, बचन, कारक, पुरूस आर काल केर कार’ने नि बदलेला। पंचपरगनिया मेंहेन मुइख रूपे किरिआ-बिसेसन, संबंध ब’धक, समुच’ए ब’धक आर बिस्म’एआदि ब’धक अब्ब’ए केर बेब’हार ह’एला। इगला बाइक के स्पष्ट, प्रभावशाली आर अर्थपूर्ण ब’नाएक काम करेला। एहे कार’ने पंचपरगनिया बेआकरन के सही रूपे समझेक तेहें अब्ब’ए केर अइधन बहुत जरुरी हेके।


इसे भी पढ़ें—

कॉपीराइट एवं अकादमिक उपयोग सूचना: इस वेबसाइट की सामग्री शोध-प्रबंध (Ph.D./पी-एच.डी.), शोध-पत्र, लेखन एवं अध्ययन कार्यों में उपयोग की जा सकती है, तथापि कृपया स्रोत के रूप में onlineppg.com का उचित संदर्भ (Citation/Reference) अवश्य दें। बिना अनुमति सामग्री का पुनः प्रकाशन, व्यावसायिक उपयोग अथवा अन्य माध्यमों में प्रकाशन प्रतिबंधित है।

✅ FAQ

अब्ब’ए (अव्यय) का अर्थ क्या है?

अब्ब’ए (अव्यय) ऐसे शब्द होते हैं जिनका रूप लिंग, बचन, कारक, पुरूस या काल के अनुसार नहीं बदलता।

पंचपरगनिया व्याकरण में अब्ब’ए के कितने भेद हैं?

पंचपरगनिया व्याकरण में अब्ब’ए के चार प्रमुख भेद माने जाते हैं— किरिआ-बिसेसन, संबंध ब’धक, समुच’ए ब’धक तथा बिस्म’एआदि ब’धक।

किरिआ-बिसेसन अब्ब’ए क्या है?

जो अव्यय शब्द किरिया की विशेषता बताता है, उसे किरिआ-बिसेसन अब्ब’ए कहा जाता है।

संबंध ब’धक अब्ब’ए क्या है?

जो अव्यय वाक्य में दो पदों के बीच संबंध स्थापित करता है, उसे संबंध ब’धक अब्ब’ए कहा जाता है।

समुच’ए ब’धक अब्ब’ए क्या है?

जो अव्यय दो शब्दों, पदों या वाक्यों को जोड़ता है, उसे समुच’ए ब’धक अब्ब’ए कहा जाता है।

बिस्म’एआदि ब’धक अब्ब’ए क्या है?

जो अव्यय हर्ष, दुःख, आश्चर्य, तिरस्कार आदि मनोभाव व्यक्त करता है, उसे बिस्म’एआदि ब’धक कहा जाता है।



Spread the love