प्रस्तावना
पंचपरगनिया भाषा का क्षेत्र विस्तार: पंचपरगनिया भासा झारखंड केर एकटा नामकरा छेतरिय आर समपरक’ भासा हेके। इ भासा किबल पाँचपरगना छेतर’ तके सीमित नेखे बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा आर आसाम तक फइलल एकटा बिसतिरित भासा रूपे देखे पाउआएला।
भासा केर छेतर’ बिस्तार केर मतलब उ भउग’लिक एरिया ले आहे जाहाँ उ भासा कह’इआ लग बस’बास कर’एँला आर आपन डेली जीवन मेंहेन उ भासा केर बेब’हार कर’एँला। मानव समाज केर आवागमन, व्यापार, संस्कृति, विवाह-संबंध, रोजगार आर धार्मिक परचार-परसार केर कार’ने कन’ भासाक बिस्तार धीरे-धीरे बाढ़ते जाएला। पंचपरगनिया भासाउ इ रकमेक ऐतिहासिक आर सामाजिक प्रक्रिया केर माध्यमे बिसतिरित ह’ते गेलक।
पंचपरगनिया नामकरण और क्षेत्र विस्तार
ढेइर लगेक एहे धारना आहे कि “पंचपरगनिया” नाम मातर’ राँची जिलाक पाँच परगना — सिल्ली, बुंडू, राहे, तमाड़ आर बारेन्दा (बांड़दा) — ले जुड़ल आहे। किंतु इ धारना टा पूरा सही ना लागे।
आसल मेंहेन “पंचपरगनिया” सब्द’ केर संबंध समपुरन’ पाँचपरगना छेतर’ मेंहेन बस’बास कर’इआ भिनु-भिनु जाति समुदाय आर उगलाक साझा समपरक’ भासा ले आहे। पाँचपरगना इ भासाक केन्दर’ जरूर हेके, किंतु एकर वास्तविक बिस्तार एतिक बड़े छेतर’ मेंहेन आहे जेकर प्रभाव झारखंड केर बाहिरउ देखे पाउआएला।
पंचपरगनिया भाषा कहाँ-कहाँ बोली जाती है?
झारखंड में क्षेत्र विस्तार
पंचपरगनिया मुख्य रूपे झारखंड केर हेंठे देल छेतर’ मेंहेन कहल जाएला—
- सिल्ली
- बुंडू
- तमाड़
- राहे
- सोनाहातु
- अनगड़ा
- अंड़की
- ईचागढ़
- चाण्डिल
- गम्हरिया
- कुचाई
- सरायकेला-खरसावाँ
- जमशेदपुर
- गोइलकेरा
- मनोहरपुर
- बोकारो
- धनबाद
- गिरिडीह
- हजारीबाग
पश्चिम बंगाल में क्षेत्र विस्तार
पश्चिम बंगाल केर अनेक सीमावर्ती क्षेत्र मेंहेन पंचपरगनिया केर प्रभाव देखे पाउआएला—
- पुरूलिया
- झाइलदा
- बाघमुंडी
- मानभूम क्षेत्र
हिंआ “मेसा-कसा बांगला” चाहे “टाँइड़ बांगला” केर रूप मेंहेन पंचपरगनियाक लसिंद आस्ट’ देखाएला।
ओड़िशा में क्षेत्र विस्तार
ओड़िशा केर सीमावर्ती क्षेत्र मेंहेन पंचपरगनिया भासा संपर्क भासा रूपे बेब’हार करल जाएला—
- राउरकेला
- बनईगढ़
- सुंदरगढ़
- मयूरभंज
- क्योंझर
- पानपोस
- बामड़ा
- जाजपुर
आसाम में क्षेत्र विस्तार
रोजगार आर मजदूरी करेक कार’ने पाँचपरगना बाटेले ढेइर लग आसाम जाए आहेन। एहे कार’ने आसाम केर किछु छेतर’ मेंहनउ पंचपरगनिया कह’इआ समुदाय पाउआएँला—
- तेजपुर
- रंगिया
- रांगापाड़ा
- दारांग जिला
- तिनसुखिया
विद्वानों के अनुसार पंचपरगनिया का क्षेत्र विस्तार
डॉ॰ उदय नारायण तिवारी का मत
डाॅ॰ उदय नारायण तिवारी जि पंचपरगनिया के राँची जिलाक पूर्वी क्षेत्र — सिल्ली, बुंडू, सोनाहातु, तमाड़ आर राहे — केर भासा मान’आहंए।
डॉ॰ ग्रियर्सन का मत
डाॅ॰ ग्रियर्सन पंचपरगनिया के “पूर्वी मगही” केर एकटा रूप मानलएँ आर तमाड़ क्षेत्र मेंहेन अधिक प्रचलन हएक कार’ने एके “तमड़िया” कहलएँ।
किंतु बादेक विद्वान गिला इ मत केर आलोचना करलंए काहेकि पंचपरगनिया मेंहेन बंगला, उड़िया आर स्थानीय जातिगत भासा केर प्रभाव बेसी देखाएला।
डॉ॰ श्रवण कुमार गोस्वामी का मत
डाॅ॰ श्रवण कुमार गोस्वामी जि आसट’ रूपे कइ आहंए कि पंचपरगनिया के मगही कहना उचित ना ला। उमन अनुसार इ नागपुरी ले अलग एकटा स्वतंत्र भाषिक रूप हेके।
किंतु एखन पंचपरगनिया एकटा आलेदा भासा रुपे आपन चिन्हाप बनाए आहे आर झारखण्ड मेहेन एखन दितीय राजभासा केर दरजा मिल आहे |
डॉ॰ बिसेश्वर प्रसाद केशरी का मत
डाॅ॰ केशरी जि पंचपरगनिया केर विस्तार पुरूलिया तक मान’आहंए। उमन अनुसार पंचपरगनिया मेंहेन बंगला प्रभाव आसट’ रूपे देखाएला।
प्रो॰ केशरी कुमार सिंह का मत
प्रो॰ केशरी कुमार सिंह जि अनुसार पंचपरगनिया मेंहेन भोजपुरी-मगही प्रभाव कम आर बंगला प्रभाव अधिक देखाएला। एहे बिसेसता एके अइन’ बिहारी भासा ले अलग पहचान देला।
पंचपरगनिया में बंगला प्रभाव के कारण
1. ऐतिहासिक कारण
इतिहास अनुसार बंगाल बाटे ले अनेक लग मानभूम आर पाँचपरगना छेतर’ मेंहेन आएके बसलएँ। उमन केर भासा बंगला रहे जे धीरे-धीरे स्थानीय पंचपरगनिया संग मेसाए लागलक।
2. धार्मिक कारण
चैतन्य महाप्रभु जि जखन कृष्ण भक्तिक परचार करेक तेहें पाँचपरगना आए रहंए तखन उमन बंगला भासा मेंहेन भजन-कीर्तन कइर रहंए। एकर गहरा प्रभाव हिंआक संस्कृति आर भासा मेहेन हलक।
3. विवाह-संबंध
पाँचपरगना आर बंगाल छेतर’ केर बीच बहुत पुरना समइले विवाह-संबंध रइ आहे। एहे कारने भासिक आदान-परदान स्वाभाविक रूपे ह’ते गेलक।
पंचपरगनिया और नागपुरी में अंतर
किछु विद्वान पंचपरगनिया के नागपुरी केर विभासा कहलंए, किंतु इ मत टा पूरा सही नाइ बुझातेहे।
दुइअ भासा मेंहेन—
- उच्चारण
- शब्द संरचना
- व्याकरण
- ध्वनि तंत्र
- लोकगीत
- ताल-लय
- संस्कृति
- रहन-सहन
- परब-तिहार
एमाइन मेंहेन आसट’ अन्तर देखे पाउआएला।
पंचपरगनिया भाषा विकास समिति का योगदान
1982-83 मेंहेन “पंचपरगनिया भाषा विकास समिति” गठन हल बादे पंचपरगनिया भासा छेतर’ बिस्तार संबंधी अनेक अनुसंधान करल गेलक।
डाॅ॰ करम चन्द्र अहीर जि आर जोतिलाल महादानी जि भिनु – भिनु छेतर’ घुइर-घुइर कहन भाषा सर्वेक्षण करलंए आर परमान देलंए कि पंचपरगनिया पाँचपरगना ले बहुते बड़े छेतर’ मेंहेन कहल जाएला।
लोकगीत और सांस्कृतिक समानता
सिंहभूम, ओड़िशा आर पुरूलिया क्षेत्र मेंहेन पंचपरगनिया सुर-ताल, लोकगीत, नाच-गान आर संसकीरति पाँचपरगना जेसनेइ देखे पाउआएला।
उदाहरण सरुप —
“ख’जा ख’ज’इते आलि, पुछा पुछ’इते आलि
मानुआ कर घर कति धुर…”
इ रकमेक लोकगीत भासिक आर साँसकिरतिक एकता केर परमान हेके।
पंचपरगनिया भाषा का वास्तविक महत्व
पंचपरगनिया किबल एकटा छेतरिय भासा ना लागे बल्कि झारखंड, बंगाल आर ओड़िशा केर सीमाबरती समाज के जोड़’इआ एकटा मजबूत साँसकिरतिक कड़ी हेके।
इ भासा आदिवासी आर गैर-आदिवासी, देहाति आर सहरी, किसान आर मजदूर — सभेक मांझे समपरक’ भासा रूपे काम करेला।
सारांश
उपरेक विवेचन केर आधारे कहल जाए पाराए कि पंचपरगनिया भासाक छेतर’ बिस्तार पाँचपरगना ले बहुते बड़े एरिया तक फैलल आहे। झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा आर आसाम तक इ भासा टा भिनु -भिनु रूपे उपयोग करल जाएला।
पंचपरगनिया मेंहेन बंगला, उड़िया आर स्थानीय जातिगत भासा केर लासिंद जरूर देखाएला, किंतु एकर आपन आलेदा भासिक पहचान, ध्वनि संरचना, लोक संसकीरति आर सामाजिक आधार आहे।
एहे कारण पंचपरगनिया के एकटा समृद्ध, जीवंत आर व्यापक छेतर’ विस्तार आवला आलेदा छेतरीय भासा रूपे मानल जाना टा उचित हेके।
FAQ
❓ पंचपरगनिया भाषा का क्षेत्र विस्तार कहाँ-कहाँ है?
पंचपरगनिया भाषा मुख्य रूप से झारखंड के पाँच परगना क्षेत्र में बोली जाती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम तथा अन्य राज्यों में भी पंचपरगनिया भाषी समुदाय निवास करते हैं।
❓ पंचपरगनिया भाषा झारखंड के किन जिलों में बोली जाती है?
पंचपरगनिया भाषा मुख्य रूप से राँची, बुंडू, तमाड़, सोनाहातु, सिल्ली, राहे, अनगड़ा, अंड़की, चांडिल आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।
❓ पंचपरगनिया भाषा का प्रसार अन्य राज्यों तक कैसे हुआ?
रोजगार, व्यापार, पलायन, विवाह संबंध, सांस्कृतिक संपर्क तथा लोक परंपराओं के कारण पंचपरगनिया भाषा का विस्तार अन्य राज्यों तक हुआ।
❓ क्या पंचपरगनिया केवल झारखंड में ही बोली जाती है?
नहीं, पंचपरगनिया भाषा झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम तथा कुछ अन्य क्षेत्रों में भी बोली और समझी जाती है।
❓ पंचपरगनिया भाषा किस भाषा परिवार से संबंधित है?
पंचपरगनिया भाषा भारतीय आर्य भाषा परिवार से संबंधित मानी जाती है।
❓ पंचपरगनिया भाषा का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
पंचपरगनिया भाषा लोकगीत, लोककथा, पर्व-त्योहार, लोकसंस्कृति तथा सामाजिक परंपराओं की प्रमुख वाहक भाषा है।
❓ पंचपरगनिया भाषा को संपर्क भाषा क्यों कहा जाता है?
पाँच परगना क्षेत्र में विभिन्न जाति एवं समुदाय के लोग आपसी संवाद के लिए पंचपरगनिया भाषा का उपयोग करते हैं, इसलिए इसे संपर्क भाषा कहा जाता है।
❓ पंचपरगनिया भाषा बोलने वालों की अनुमानित संख्या कितनी है?
विभिन्न विद्वानों के अनुसार पंचपरगनिया भाषा बोलने वालों की संख्या लाखों में है तथा वर्तमान समय में यह संख्या लगभग 10 से 15 लाख तक मानी जाती है।
❓ पंचपरगनिया भाषा की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
इस भाषा की प्रमुख विशेषताएँ इसकी ध्वनिगत, व्याकरणिक, सांस्कृतिक तथा लोकसाहित्यिक विशेषताएँ हैं।
❓ पंचपरगनिया भाषा का भविष्य कैसा है?
शोध, शिक्षा, डिजिटल माध्यम, साहित्य लेखन और सामाजिक जागरूकता के कारण पंचपरगनिया भाषा का भविष्य उज्ज्वल माना जा रहा है।
