Panchpargania Lokkatha MCQ Quiz: पंचपरगनिया लोक साहित्य में लोककथाओं का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इन कथाओं में ग्रामीण जीवन, पारिवारिक संबंध, लोकविश्वास, बुद्धि-चातुर्य, पशु-पक्षियों का मानवीकरण, सामाजिक व्यवहार तथा जीवन से जुड़े अनेक अनुभव सहज रूप में अभिव्यक्त होते हैं। पंचपरगनिया भाषा एवं साहित्य से संबंधित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लोककथाओं के पात्र, घटनाक्रम, कथ्य और प्रमुख प्रसंग विशेष रूप से उपयोगी होते हैं।
यहाँ ‘चालाक बिलाइ’, ‘पँठी रानी’, ‘बिन बापेक छुआ’ और ‘मामा-भगिना’ लोककथाओं का संक्षिप्त कथासार तथा परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य दिए जा रहे हैं।
1. चालाक बिलाइ
कथासार
‘चालाक बिलाइ’ बुद्धि, चतुराई और परिस्थिति-बोध पर आधारित पंचपरगनिया लोककथा है। एक बूढ़ी नानी के साथ एक बिल्ली रहती है। बिल्ली की दीदी दूसरे गाँव में अपने ससुराल में रहती है। नानी के यहाँ खाने-पीने की कोई कमी नहीं होती, फिर भी अपनी दीदी की याद में बिल्ली धीरे-धीरे दुबली होती जाती है।
नानी जब उसके दुबले होने का कारण पूछती है, तब बिल्ली अपनी दीदी की याद की बात बताती है। नानी उसे दीदी के घर जाकर कुछ समय रहने और मन भर जाने पर लौट आने की सलाह देती है। बिल्ली अपनी दीदी के घर जाने के लिए निकल पड़ती है।
रास्ते में उसे कई संकटों का सामना करना पड़ता है। जंगल में मिलने वाले जीव उसे खाने की इच्छा प्रकट करते हैं, किंतु बिल्ली अपनी बुद्धि से उन्हें समझाती है कि वह अभी दुबली है। वह दीदी के घर जाकर खूब खा-पीकर मोटी होने और कुछ महीनों बाद लौटने की बात कहकर उनसे बच निकलती है।
बिल्ली दीदी के घर पहुँचती है और वहाँ लगभग छह महीने तक रहकर खूब खाती-पीती है। इससे वह मोटी और स्वस्थ हो जाती है। वापसी के समय दीदी उसकी सुरक्षा के लिए एक उपाय करती है और बिल्ली उसी युक्ति की सहायता से रास्ते के खतरों से बचने का प्रयास करती है।
वापसी में उसे फिर वे जीव मिलते हैं जो पहले उसे खाने की बात कह चुके थे। किंतु बिल्ली अपनी चतुराई और सूझ-बूझ से उन्हें चकमा देते हुए नानी के पास सुरक्षित पहुँच जाती है। जब वह नानी को पूरी घटना सुनाती है, तब कथा का मूल संदेश सामने आता है—जहाँ केवल बल से काम नहीं बनता, वहाँ बुद्धि और विवेक से काम लेना चाहिए।
प्रमुख पात्र
- बूढ़ी नानी
- बिल्ली
- बिल्ली की दीदी
- भालू राजा
- रास्ते में मिलने वाले अन्य जीव
मुख्य कथ्य
इस लोककथा का केंद्रीय कथ्य बुद्धि, चतुराई और संकट के समय सही निर्णय लेने की क्षमता है। बिल्ली शारीरिक रूप से शक्तिशाली नहीं है, फिर भी वह अपने विवेक और सूझ-बूझ के बल पर कठिन परिस्थितियों से स्वयं को बचाती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- लोककथा का नाम — चालाक बिलाइ
- कथा की मुख्य पात्र — बिल्ली
- बिल्ली एक बूढ़ी नानी के साथ रहती है।
- बिल्ली की दीदी दूसरे गाँव में अपने ससुराल में रहती है।
- नानी के यहाँ भोजन की कमी नहीं थी।
- बिल्ली अपनी दीदी की याद में दुबली होती जाती है।
- नानी बिल्ली को उसकी दीदी के घर जाने की सलाह देती है।
- बिल्ली दीदी के घर जाने के लिए जंगल के रास्ते निकलती है।
- रास्ते में उसे कई जीवों से खतरा होता है।
- कथा में भालू राजा का प्रसंग महत्वपूर्ण है।
- बिल्ली अपनी दुबली अवस्था का तर्क देकर तत्काल खतरे से बचती है।
- वह लौटते समय मोटी होकर आने की बात कहती है।
- बिल्ली लगभग छह महीने दीदी के घर रहती है।
- दीदी के घर वह खूब खा-पीकर मोटी हो जाती है।
- वापसी के समय बिल्ली की दीदी उसकी सुरक्षा के लिए एक युक्ति करती है।
- बिल्ली रास्ते में फिर संकटों का सामना करती है।
- बिल्ली संकटों से बल के बजाय बुद्धि और चतुराई से निकलती है।
- कथा में पशु-पात्रों के माध्यम से मानवीय व्यवहार और बुद्धि का चित्रण हुआ है।
- कथा का प्रमुख संदेश — जहाँ बल काम न करे, वहाँ बुद्धि से काम लेना चाहिए।
- कथा के अंत में नानी बिल्ली की पूरी बात सुनकर उसकी चतुराई से प्रसन्न होती है।
2. पँठी रानी
कथासार
‘पँठी रानी’ राजपरिवार, संतान की इच्छा, ईर्ष्या, षड्यंत्र और अंततः सत्य की विजय पर आधारित पंचपरगनिया लोककथा है। एक नगर में एक राजा रहता है। उसकी सात रानियाँ होती हैं, लेकिन लंबे समय तक उसे संतान-सुख प्राप्त नहीं होता।
कथा में आगे पँठी रानी और उसके पुत्र का प्रसंग आता है। पँठी रानी का पुत्र धीरे-धीरे बड़ा होता है और अपनी सुंदरता तथा व्यवहार के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। राजा भी उस बालक के संपर्क में आता है और उससे स्नेह करने लगता है।
बालक के प्रति राजा के बढ़ते लगाव से सातों रानियों में ईर्ष्या उत्पन्न हो जाती है। वे षड्यंत्र रचती हैं और ऐसी स्थिति पैदा करती हैं कि बालक को समाप्त करने का आदेश दिया जाए। राजा अपने सिपाही को पँठी रानी के पुत्र को जंगल में ले जाकर मारने और उसका रक्त लाने का आदेश देता है।
सिपाही बालक को जंगल में ले जाता है, लेकिन उसे मारने के बजाय छोड़ देता है। बालक के स्थान पर वह कुत्ते का रक्त लेकर राजा के पास लौटता है। सातों रानियाँ समझती हैं कि उनका उद्देश्य पूरा हो गया।
इसके बाद कथा में सुगा-सुगनी का प्रसंग आता है। उनकी बातचीत सुनकर राजा को वास्तविकता का ज्ञान होता है। राजा समझ जाता है कि उसके साथ छल हुआ है और निर्दोष बालक के विरुद्ध षड्यंत्र रचा गया था।
सत्य का पता चलने के बाद राजा अपने सिपाही को बुलाता है और पँठी रानी के पुत्र की खोज करवाता है। बालक जीवित मिलता है। अंततः पँठी रानी और उसके पुत्र को सम्मानपूर्वक राजमहल में लाया जाता है, जबकि षड्यंत्र रचने वाली सातों रानियों को अपने कर्म का परिणाम भुगतना पड़ता है।
इस प्रकार कथा में ईर्ष्या और छल पर सत्य, मातृत्व और न्याय की विजय दिखाई गई है।
प्रमुख पात्र
- राजा
- पँठी रानी
- पँठी रानी का पुत्र
- सात रानियाँ
- सिपाही
- सुगा
- सुगनी
मुख्य कथ्य
कथा का प्रमुख कथ्य संतान-सुख, मातृत्व, ईर्ष्या, षड्यंत्र, निर्दोष बालक की रक्षा और अंततः सत्य की विजय है। कथा यह भी बताती है कि ईर्ष्या और छल लंबे समय तक सत्य को दबाकर नहीं रख सकते।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- लोककथा का नाम — पँठी रानी
- कथा का प्रमुख परिवेश — राजपरिवार
- राजा की कुल सात रानियाँ थीं।
- राजा को लंबे समय तक संतान-सुख प्राप्त नहीं हुआ था।
- कथा में पँठी रानी और उसका पुत्र केंद्रीय भूमिका में हैं।
- पँठी रानी का पुत्र सुंदर और आकर्षक बालक के रूप में चित्रित है।
- राजा का बालक के प्रति स्नेह बढ़ता है।
- बालक के प्रति राजा के लगाव से सातों रानियों में ईर्ष्या उत्पन्न होती है।
- सातों रानियाँ बालक के विरुद्ध षड्यंत्र रचती हैं।
- राजा सिपाही को बालक को जंगल में ले जाकर मारने का आदेश देता है।
- सिपाही बालक को वास्तव में नहीं मारता।
- सिपाही बालक के स्थान पर कुत्ते का रक्त राजा के पास ले जाता है।
- बालक जंगल में जीवित बच जाता है।
- कथा में सुगा-सुगनी सत्य उद्घाटित करने वाले महत्वपूर्ण पात्र हैं।
- सुगा-सुगनी की बातचीत से राजा को वास्तविक घटना का पता चलता है।
- राजा को सातों रानियों के षड्यंत्र का ज्ञान होता है।
- पँठी रानी का पुत्र पुनः राजा के पास लाया जाता है।
- अंत में पँठी रानी और उसके पुत्र को सम्मान मिलता है।
- सातों रानियों को अपने छल और ईर्ष्या का परिणाम भुगतना पड़ता है।
- कथा के प्रमुख भाव — मातृत्व, ईर्ष्या, छल, करुणा और न्याय।
- कथा का संदेश — सत्य अंततः सामने आता है और अन्याय स्थायी नहीं होता।
3. बिन बापेक छुआ
कथासार
‘बिन बापेक छुआ’ साहस, पिता की खोज, संघर्ष, लोकविश्वास और चमत्कार से जुड़ी पंचपरगनिया लोककथा है। कथा के आरंभ में एक राजा और रानी का वर्णन मिलता है। रानी के मन में मांस खाने की इच्छा होती है, इसलिए राजा शिकार के लिए जंगल चला जाता है। कई दिन बीत जाने पर भी राजा वापस नहीं लौटता।
जंगल में शिकार करते हुए राजा का सामना एक खतरनाक रनभँइसी से होता है। रनभँइसी राजा पर हमला कर उसे मार देती है। इधर राजा के न लौटने से रानी चिंतित रहती है। कुछ समय बाद रानी एक सुंदर पुत्र को जन्म देती है।
बालक धीरे-धीरे बड़ा होता है। गाँव के बच्चे उसे ‘बिन बापेक छुआ’ कहकर चिढ़ाने लगते हैं। यह बात उसके मन को बहुत दुख पहुँचाती है। वह अपनी माँ से अपने पिता के बारे में पूछता है। बहुत पूछने पर माँ उसे बताती है कि उसका पिता शिकार के लिए जंगल गया था और फिर वापस नहीं लौटा।
पिता के बारे में जानने के बाद बालक उसे खोजने के लिए जंगल की ओर निकल पड़ता है। लंबी यात्रा के कारण उसे भूख और प्यास लगती है। वह जंगल में भटकता है और अनेक जीव-जंतुओं से उसका सामना होता है। कथा में बाघ, भालू, हाथी, सियार, लकड़ा और बाँदर जैसे वन्य जीवों का भी उल्लेख मिलता है।
आगे चलकर वही खतरनाक रनभँइसी उसके सामने आती है। उसके सींग में एक हड्डी लटकी देखकर बालक को संदेह होता है और घटनाओं को जोड़कर वह समझ जाता है कि इसी रनभँइसी ने उसके पिता को मारा था। क्रोध और साहस के साथ वह रनभँइसी से मुकाबला करता है और उसे मार देता है।
पिता की मृत्यु की सच्चाई जानकर बालक अत्यंत दुखी होकर रोने लगता है। उसके विलाप को महादेव और पार्वती सुनते हैं। वे वहाँ पहुँचकर उसके दुःख का कारण पूछते हैं। बालक पूरी घटना बताता है। उसके दुःख से प्रभावित होकर महादेव-पार्वती उसकी सहायता करते हैं और अमृत जल के माध्यम से उसके पिता को पुनर्जीवित कर देते हैं।
पिता के जीवित होने पर बालक अत्यंत प्रसन्न होता है। दोनों साथ घर लौटते हैं। पिता-पुत्र के मिलन से परिवार और नगर में खुशी फैल जाती है। इसके बाद उस बालक को ‘बिन बापेक छुआ’ कहकर चिढ़ाना बंद हो जाता है।
प्रमुख पात्र
- राजा
- रानी
- बिन बापेक छुआ
- रनभँइसी
- विभिन्न वन्य जीव
- महादेव
- पार्वती
मुख्य कथ्य
इस लोककथा में पिता की खोज, पुत्र का साहस, संघर्ष, प्रतिशोध, पारिवारिक प्रेम, लोकविश्वास और चमत्कार प्रमुख हैं। बालक कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने पिता की खोज नहीं छोड़ता और अंततः सत्य तक पहुँचता है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- लोककथा का नाम — बिन बापेक छुआ
- कथा के आरंभ में राजा और रानी का वर्णन है।
- रानी की इच्छा पर राजा शिकार के लिए जंगल जाता है।
- राजा कई दिनों तक घर वापस नहीं लौटता।
- जंगल में राजा का सामना रनभँइसी से होता है।
- रनभँइसी राजा को मार देती है।
- राजा के बाद रानी एक सुंदर पुत्र को जन्म देती है।
- गाँव के बच्चे उस बालक को ‘बिन बापेक छुआ’ कहकर चिढ़ाते हैं।
- बालक अपनी माँ से अपने पिता के विषय में पूछता है।
- पिता की सच्चाई जानने के बाद बालक उसकी खोज में जंगल जाता है।
- यात्रा के दौरान बालक को भूख और प्यास का सामना करना पड़ता है।
- कथा में बाघ, भालू, हाथी, सियार, लकड़ा और बाँदर जैसे वन्य जीवों का उल्लेख मिलता है।
- बालक का सामना उसी रनभँइसी से होता है जिसने उसके पिता को मारा था।
- रनभँइसी के सींग से जुड़ा संकेत बालक को पिता की मृत्यु की सच्चाई तक पहुँचाता है।
- बालक साहसपूर्वक रनभँइसी का सामना करता है।
- बालक अंततः रनभँइसी को मार देता है।
- पिता की मृत्यु पर बालक दुखी होकर रोता है।
- बालक का विलाप महादेव और पार्वती सुनते हैं।
- महादेव-पार्वती बालक की सहायता करते हैं।
- अमृत जल के माध्यम से उसके पिता को पुनर्जीवित किया जाता है।
- कथा का अंत पिता-पुत्र के पुनर्मिलन से होता है।
- कथा के प्रमुख भाव — साहस, पुत्र-प्रेम, खोज, संघर्ष, लोकविश्वास और चमत्कार।
- कथा का प्रमुख संदेश — दृढ़ संकल्प और साहस से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है।
4. मामा-भगिना
कथासार
‘मामा-भगिना’ हास्य, चतुराई और व्यावहारिक बुद्धि पर आधारित पंचपरगनिया लोककथा है। कथा में एक चालाक किसान का बेटा और उसका मामा प्रमुख पात्र हैं। एक दिन मामा उनके घर आता है। अगले दिन मामा और भगिना मछली पकड़ने के लिए नदी की ओर जाते हैं।
नदी पहुँचकर भगिना बँसीडांग को बार-बार पानी में फेंकता और तुरंत निकाल लेता है। मामा जब उससे इसका कारण पूछता है, तो भगिना चालाकी से बताता है कि इस बँसीडांग में ऐसा गुण है कि इससे पकड़ी गई मछलियाँ सीधे घर पहुँच जाती हैं। मामा उसकी बात पर विश्वास कर लेता है।
घर लौटने पर भगिना की चाल पहले से तैयार रहती है। मामा को ऐसा विश्वास हो जाता है कि वास्तव में बँसीडांग के कारण मछलियाँ घर पहुँच गई हैं। वह उस बँसीडांग को खरीदना चाहता है। भगिना उसकी कीमत दो सौ रुपये बताता है और मामा पैसे देकर उसे खरीद लेता है।
अगले दिन मामा वही बँसीडांग लेकर नदी जाता है और भगिना की बताई युक्ति के अनुसार उसका प्रयोग करता है। घर लौटकर जब वह मछलियाँ खोजता है तो वहाँ कुछ नहीं मिलता। तब उसे समझ आता है कि भगिना ने उसे छल लिया है। इस घटना से वह शर्मिंदा हो जाता है और कुछ समय तक भगिना के घर भी नहीं जाता।
कई वर्ष बाद मामा फिर भगिना के घर पहुँचता है। भगिना इस बार भी उसके लिए एक नई युक्ति तैयार करता है। वह एक टंकी में रुपये रखकर ऐसी स्थिति बनाता है कि मामा को लगे कि उसके पास एक ‘टिटु घोड़ा’ है जो प्रतिदिन एक टंकी मल के माध्यम से पैसा देता है।
मामा फिर उसकी बातों में आ जाता है और टिटु घोड़ा खरीदने की इच्छा व्यक्त करता है। भगिना घोड़े की कीमत पाँच सौ रुपये बताता है। मामा पाँच सौ रुपये देकर घोड़े को अपने घर ले जाता है।
घर पहुँचकर मामा घोड़े की खूब सेवा करता है और इस आशा में रहता है कि उससे रुपये प्राप्त होंगे। कई दिन बीत जाते हैं, लेकिन घोड़े से कोई पैसा नहीं मिलता। बाद में घोड़ा सामान्य रूप से मल त्याग करता है, तब मामा को दूसरी बार भी समझ में आता है कि भगिना ने अपनी चालाकी से उसे ठग लिया है।
अंततः मामा अत्यंत शर्मिंदा होकर वहाँ से चला जाता है। कथा यह संकेत देती है कि सिर्फ लालच या बड़ी आशा पर्याप्त नहीं है; व्यक्ति के पास बुद्धि और विवेक भी होना चाहिए।
प्रमुख पात्र
- मामा
- भगिना
- भगिना का पिता / किसान
- टिटु घोड़ा
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- कथा का नाम — मामा-भगिना
- कथा के मुख्य पात्र — मामा और भगिना
- भगिना एक चालाक किसान का बेटा है।
- मामा और भगिना मछली पकड़ने नदी जाते हैं।
- कथा का पहला प्रमुख प्रसंग बँसीडांग से जुड़ा है।
- भगिना मामा को विश्वास दिलाता है कि बँसीडांग से पकड़ी गई मछली सीधे घर पहुँच जाती है।
- मामा बँसीडांग को दो सौ रुपये में खरीदता है।
- अगले दिन मामा को पता चलता है कि बँसीडांग में ऐसा कोई गुण नहीं है।
- पहली बार ठगे जाने के बाद मामा कुछ समय तक भगिना के घर नहीं जाता।
- कई वर्ष बाद मामा फिर भगिना से मिलने आता है।
- दूसरी चाल टिटु घोड़ा से जुड़ी है।
- भगिना मामा को विश्वास दिलाता है कि टिटु घोड़ा प्रतिदिन मल के माध्यम से पैसा देता है।
- टिटु घोड़े की कीमत पाँच सौ रुपये बताई जाती है।
- मामा पाँच सौ रुपये देकर घोड़ा खरीदता है।
- घोड़ा वास्तव में मल के माध्यम से पैसा नहीं देता है।
- मामा दूसरी बार भी भगिना की बातों में आकर ठगा जाता है।
- भगिना कथा में चतुर, चालाक और युक्तिपूर्ण पात्र है।
- मामा अपेक्षाकृत सरल और जल्दी विश्वास करने वाला पात्र है।
- कथा में हास्य और व्यंग्य का प्रभाव स्पष्ट है।
- कथा का प्रमुख संदेश — लालच के साथ विवेक न हो तो व्यक्ति आसानी से ठगा जा सकता है।
- कथा के अंत में बुद्धि और समझ-बूझ की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु
- चारों लोककथाओं के मुख्य पात्र, प्रमुख घटनाएँ, संबंध और केंद्रीय संदेश ध्यान से याद रखें।
- संख्या, वस्तु और विशेष प्रसंगों पर विशेष ध्यान दें, जैसे सात रानियाँ, छह महीने, दो सौ रुपये, पाँच सौ रुपये, बँसीडांग, टिटु घोड़ा, रनभँइसी, सुगा-सुगनी आदि।
- “किस कथा में कौन-सा पात्र या घटना है?” प्रकार के प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
- पात्रों की विशेषताओं—जैसे चतुराई, साहस, ईर्ष्या, सरलता और विवेक—को कथा के संदर्भ में समझें।
- लोकविश्वास, ग्रामीण जीवन, पशु-पक्षी, पारिवारिक संबंध और चमत्कारिक प्रसंगों को भी ध्यान में रखें।
- केवल सार पढ़कर Quiz न दें। MCQ Quiz देने से पहले संबंधित लोककथाओं को विस्तार से पढ़ लें, उसके बाद ही Quiz हल करें।
- Quiz पूरा करने के बाद जिन प्रश्नों में गलती हुई हो, उनसे संबंधित कथा या प्रसंग को दोबारा पढ़ें।
- स्रोत-नोट: यहाँ प्रस्तुत चारों लोककथाएँ परमानन्द महतो की पुस्तक पंचपरगनिया लोककथा (प्रथम संस्करण, 2021, पृथ्वी प्रकाशन, नई दिल्ली) के पाठ पर आधारित हैं। अलग-अलग पुस्तकों या मौखिक परंपराओं में एक ही लोककथा के स्वरूप में कुछ अंतर मिल सकता है; इसलिए संबंधित MCQ Quiz भी इसी पुस्तक के पाठ को आधार बनाकर तैयार किया गया है।
चारों लोककथाओं का MCQ Quiz
‘चालाक बिलाइ’, ‘पँठी रानी’, ‘बिन बापेक छुआ’ और ‘मामा-भगिना’ लोककथाओं से संबंधित प्रश्नों के माध्यम से अपनी तैयारी की जाँच करें। Quiz देने से पहले संबंधित लोककथाओं को विस्तार से पढ़ लेना अधिक उपयोगी रहेगा।
पंठि रानि /चालाक बिलाइ /बिन बापेक छुवा /मामा भगिना – MCQ Quiz
Results
#1. चालाक बिलाइ कहनी टाएं नानी बुढ़िया हेंठे देल कन जिब टाके पइस आहे?
#2. ‘‘नानी तर ताहां मर कन’ खाएक-पीएक घटी नेखे मंतुक साराखने मके मर दीदी मने हएला आर एहे चिंता माहनेइ के जान मएं दिनेक-दिन दुबराले जा तहं।’’ इ कथन टा हेंठे देल कन कहनी केर हेके?
#3. चालाक बिलाइ कहनी टाएं बिलाइ केकर पास रहेला?
#4. चालाक बिलाइ कहनी टाएं बिलाइ गिला कए बहिन रहएं?
#5. चालाक बिलाइ कहनी टाएं बिलाइ केर दिदिक ससुर घर गांव कतिक धुरे आहे?
#6. ‘‘आरे बेटी! इटाक खातिर काहे चिंता करिसला? जा आइजे तएं तर दिदि के देइख आव। उटाए जदि मन ना भरे त’ अकर पासेइ छअ महिना रइह लेबे आर घुइर आवे।’’ इ कथन टा हेंठे देल केकर हेके?
#7. चालाक बिलाइ कहनी टाएं बिलाइ कए कस धुरे भालु के भेंटाएला?
#8. चालाक बिलाइ कहनी टाएं बिलाइ कए कस धुरे बाघ के भेंटाएला?
#9. चालाक बिलाइ कहनी टाएं बिलाइ आपन दिदि घरे कए महिना रहलक?
#10. चालाक बिलाइ कहनी टाएं बिलाइ केर दिदि बिलाइ के, का निआर नानी बुढ़िया पास भेजलक?
#11. नानी बुढ़िया घरेक बिलाइ का तेहें दुबराएला?
#12. आपन दिदि घर जात कहने बिलाइ के, के छेंकेला?
#13. बिलाइ भालु आर बाघ के, दिदि घर ले, कए महिनाएं घुरमु कहेला?
#14. चालाक बिलाइ, कहनि टाएं बिलाइ आपन दिदि भाटु घरे कए महिना रहेला?
#15. चालाक बिलाइ कहनी टाएं, बिलाइ आपन दिदि घर ले, का केर भितरे पटम ह’ए कहन घुरेला?
#16. चालाक बिलाइ कहनी टाएं हेंठे देल कन पातर’ टा बिलाइ के ‘‘बिलाइ बहरिया’’ कहेला?
#17. चालाक बिलाइ कहनी टाएं हेंठे देल कन पातर’ टा बिलाइ के ‘‘बिलाइ रानी’’ कहेला?
#18. चालाक बिलाइ कहनी टाएं लउआ तुंबा टाके एक धाका देल कए क’स गुड़केला?
#19. पंठी रानी कहनी टाएं हेंठेक कन पातर’ के आठकुड़ा कहत रहएं?
#20. पंठी रानी कहनी टाएं पंठी रानीक छुआ टा कए बछर केर रहे तखन राजा छुआ सिकार जाए रहे?
#21. पंठी रानी कहनी टाएं राजाक सिपाही सउब पंठी रानीक छुआ के काटेक बदल काहां पाठालएं?
#22. ‘‘जदि मएं सं’त माएं-बापेक छुआ हेकं हले मर खातिर सउब रकम कर चीज बइन जाउक।’’ इ कथन टा हेंठे देल केकर हेके?
#23. पंठी रानी कहनी टाएं राजा छुआ कएधं बिहा करेला?
#24. पंठी रानी कहनी टाएं राजा छुआ काहां नाहाएला?
#25. पंठी रानी कहनी टाएं राजा छुआक बेटा केकर पेट ले जनम लेला?
#26. पंठि रानिक छुआटाके सउबले पहिल के देखेला?
#27. पंठि रानी कहनी टाएं बड़कि रानि का बाहाना करेला?
#28. पंठि रानि कहनी टाएं राजाक सिपाहि सउब पंठि रानिक छुआके बन का तेहें लेग’एना?
#29. पंठि रानि कहनी टाएं राजाक सिपाहि सउब केके काटएंला?
#30. पंठि रानी कहनी टाएं राजा, रानी सउब केर माएआजाल के, का रकम जाने पाएला?
#31. पंठि रानीक छुआ बन ले घर घुरेक तेहें राजा साहेब पास का सरत राखेला?
#32. बिन बापेक छुवा मेंहेन रानी के का भुंजल खाए मन करेला?
#33. ‘‘बिन बापेक छुवा’’ कहनी टाएँ जखन राजा सिकार करे जाएला तखन केके देइख के पाराएला?
#34. बिन बापेक छुवा कहनी टाएँ बने राजा के, के मारेला?
#35. बिन बापेक झुवा टाक का नाम रहे?
#36. झोरी बन, केके खजे जाए रहे?
#37. बिन बापेक छुवा कहनी टाँए रनभंइसीक सींगे केकर हाड़ लटकी रहे?
#38. बिन बापेक छुवा कहनी टाँए रनभंइसी के, के काइट रहे?
#39. झोरीक बाप का निआर जिअंत हलक?
#40. पाँचपरगनाएं “भगिना” केके कहल जाएला?
#41. मामा भगिना कहनि टाएं किसान केर बेटा हेंठे देल केसन हेके?
#42. मामा भगिना कहनि टाएं चालाक छुआ टा घर हेंठे देल कन गतिआ, गतिआरि आए रहे?
#43. मामा भगिना कहनि टाएं छुआटा हेंठे देल कन डाँग टा लेकहन उकर मामा संग नाहाए जाए रहे?
#44. मामा भगिना कहनि टाएं छुआटा उकर मामा के काहाँ नाहाए लेजाएला?
#45. मामा भगिना कहनि टाएं ‘‘ ए मां! मेइर लेगे भात-तिअन बेस के राँधबे।’’ काथा टा हेंठे देल मइधे के कहेला?
#46. मामा भगिना कहनि टाएं मामा भगिना नदि माहान आपन लुगा-फाटा साबुन देलएं तार परे सुखेक तेहें काहां घाटलएं?
#47. मामा भगिना कहनि टाएं हेंठे देल कन पातर’ टा माछ धरेक तेहें बँसीडांग के फेंकतक आर तुरते उठात रहे?
#48. ‘‘इटा बंसीडांग टाकेर गुन हेके मामा, कि फेंकाए के माछ घर पंहच’तहएं।’’ इ कथन टा हेंठे देल कन कहनी केर हेके?
#49. मामा भगिना कहनि टाएं नाहाए के आल परे मामा-भगिना के हेंठे देल कन तिअन खाएक मिल रहे?
#50. मामा भगिना कहनि टाएं भगिना आपन मामा के बंसीडांग टाक कतना पएसा लेला?
#51. मामा भगिना कहनि टाएं भगिनाक गुनिमान बंसीडांग के जखन मामा नदी लेजाएला आर हिंदे-हुंदे फेंकेला तखन, का माछ गिला सीधा घर पहंचेनला?
#52. मामा भगिना कहनि टाएं मामा, आपन भगिना घर गतिआरि ढेइर दिन तक कन तेहें नि जाएला?
#53. मामा भगिना कहनि टाएं मामा घुराए धं’ कए बछरेक बादे गतिआरि जाएला?
#54. मामा भगिना कहनि टाएं छुआटा खाली टँकी लेकहन काहां सामाहएला?
#55. मामा भगिना कहनि टाएं छुआटा ग’हाइल घर ले टँकी टाएं का बाहराएला?
#56. ‘‘ए मामा हामरेक घरे एकटा टिटु घ’ड़ा आहे, जेटा रजे एक टँकी पएसा हागेला।’’ इ कथन टा हेंठे देल कन पातर’ केर हेके?
#57. मामा भगिना कहनि टाएं भगिना आपन मामा के टिटु घ’ड़ा टा कतना दामे बेचेला?
#58. मामा भगिना कहनि टाएं मामा टिटु घ’ड़ा के हेंठे देल कन खाएक टा देला?
#59. मामा भगिना कहनि टाएं मामा टिटु घ’ड़ाक गु के, का पाएक ल’भे फेंकेला?
#60. मामा भगिना कहनि टाएं मामा टिटु घ’ड़ाक गुहे कतना पएसा पाएला?
#61. मामा भगिना कहनि टाएं हेंठे देल कन सिखटा मिलेला?
Quiz के बाद क्या करें?
Quiz पूरा करने के बाद अपने Score तथा सही-गलत उत्तरों की जाँच करें। जिन प्रश्नों में गलती हुई हो, उनसे संबंधित लोककथा या प्रसंग को दोबारा पढ़ें और फिर Quiz पुनः हल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
इन चार पंचपरगनिया लोककथाओं और संबंधित MCQ Quiz से जुड़े सामान्य प्रश्न।
इन चार लोककथाओं के नाम क्या हैं?
ये चार लोककथाएँ हैं—‘चालाक बिलाइ’, ‘पँठी रानी’, ‘बिन बापेक छुआ’ और ‘मामा-भगिना’।
ये लोककथाएँ किस पुस्तक से ली गई हैं?
यहाँ प्रस्तुत लोककथाएँ परमानन्द महतो की पुस्तक पंचपरगनिया लोककथा के पाठ पर आधारित हैं।
क्या ये लोककथाएँ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी हैं?
हाँ, पंचपरगनिया भाषा-साहित्य से संबंधित JSSC, JTET, JPSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में इन कथाओं के पात्र, घटनाएँ, प्रमुख प्रसंग और संदेश उपयोगी हो सकते हैं।
MCQ Quiz देने से पहले क्या करना चाहिए?
Quiz देने से पहले चारों लोककथाओं को विस्तार से पढ़ें और कथासार, प्रमुख पात्र तथा महत्वपूर्ण घटनाओं को एक बार दोहरा लें।
अगर Quiz में उत्तर गलत हो जाए तो क्या करें?
गलत प्रश्न से संबंधित कथा या प्रसंग को दोबारा पढ़ें और उसके बाद Quiz पुनः हल करें।
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निष्कर्ष
‘चालाक बिलाइ’,, ‘पँठी रानी’, ‘बिन बापेक छुआ’ और ‘मामा-भगिना’ पंचपरगनिया लोककथाओं में बुद्धि-चातुर्य, पारिवारिक संबंध, साहस, लोकविश्वास, ग्रामीण जीवन और मानवीय व्यवहार के विविध रूप दिखाई देते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में इन कथाओं के मुख्य पात्र, घटनाक्रम, विशेष प्रसंग और संदेश को समझना उपयोगी है। संबंधित MCQ Quiz के नियमित अभ्यास से विद्यार्थी अपनी तैयारी और विषयगत समझ का स्व-मूल्यांकन कर सकते हैं।



