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पंचपरगनिया पुस्तकें

पंचपरगनिया पुस्तकें

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पंचपरगनिया पुस्तक परिचय

पंचपरगनिया भाषा एवं साहित्य से संबंधित पुस्तकों की जानकारी विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं पाठकों तक व्यवस्थित रूप से पहुँचाने का एक शैक्षणिक प्रयास।

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इस पृष्ठ का उद्देश्य

यहाँ विभिन्न विधाओं की पंचपरगनिया पुस्तकों का परिचय, लेखक/संपादक, प्रकाशन संबंधी जानकारी एवं विषय-वस्तु का विवरण उपलब्ध कराया जाएगा। जिन पुस्तकों के लिए लेखक अथवा अधिकारधारी की अनुमति प्राप्त है, उनका सीमित Book Preview भी शैक्षणिक एवं संदर्भ उद्देश्य से उपलब्ध कराया जाएगा।

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लोक साहित्य

पंचपरगनिया लोक साहित्य पुस्तक का आवरण – डॉ. दिनेश प्रसाद सिंह
लोक साहित्य

पंचपरगनिया लोक साहित्य

✍️ लेखक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिंह 🏛️ प्रकाशक : प्रगतिशील प्रकाशन 📅 प्रथम संस्करण : 2019
पुस्तक के बारे में जानें

‘पंचपरगनिया लोक साहित्य’ में पंचपरगनिया भाषा एवं लोकसाहित्य का परिचय प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में लोकगीत, लोककथा तथा मुहावरा, कहावत, पहेली और मंत्र जैसे प्रकीर्ण लोकसाहित्य के साथ पंचपरगनिया लोकगीतों के स्वरूप, क्षेत्र-विस्तार, वर्गीकरण और विशेषताओं का विवेचन किया गया है। पंचपरगनिया लोकसाहित्य के अध्ययन के लिए यह एक उपयोगी संदर्भ पुस्तक है।

ISBN : 978-93-86246-75-2 प्रथम संस्करण : 2019
पंचपरगनिया लोकगीतों में सौन्दर्य-बोध पुस्तक का आवरण – डॉ. दिनेश प्रसाद सिंह
शोध ग्रंथ

पंचपरगनिया लोकगीतों में सौन्दर्य-बोध

🎓 Ph.D. शोध पर आधारित पुस्तक
✍️ लेखक : डॉ. दिनेश प्रसाद सिंह 🏛️ प्रकाशक : प्रगतिशील प्रकाशन 📅 प्रथम संस्करण : 2019
पुस्तक के बारे में जानें

‘पंचपरगनिया लोकगीतों में सौन्दर्य-बोध’ में सौन्दर्य-बोध की अवधारणा के साथ पंचपरगनिया लोकगीतों में निहित सौन्दर्य का अध्ययन किया गया है। पुस्तक में संस्कार गीतों, पर्व-त्योहार गीतों एवं विविध लोकगीतों के सौन्दर्य-बोध का विवेचन करते हुए भाव-सौन्दर्य और कला-सौन्दर्य की विशेषताओं को रेखांकित किया गया है। साथ ही पंचपरगनिया लोकगीतों की उपलब्धियों और भविष्य पर भी विचार किया गया है।

ISBN : 978-93-86246-74-5 प्रथम संस्करण : 2019
पंचपरगनिया लोककथाओं का साहित्यिक और सांस्कृतिक अध्ययन पुस्तक का आवरण – डॉ. पराग किशोर सिंह
शोध ग्रंथ

पंचपरगनिया लोककथाओं का साहित्यिक और सांस्कृतिक अध्ययन

🎓 Ph.D. शोध-प्रबंध पर आधारित पुस्तक
✍️ लेखक : डॉ. पराग किशोर सिंह 🏛️ प्रकाशक : झारखण्ड झरोखा 📅 प्रथम संस्करण : 2017
पुस्तक के बारे में जानें

‘पंचपरगनिया लोककथाओं का साहित्यिक और सांस्कृतिक अध्ययन’ डॉ. पराग किशोर सिंह के शोध-प्रबंध पर आधारित पुस्तक है। इसमें पंचपरगनिया भाषा के सामान्य परिचय के साथ लोककथाओं का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से विश्लेषण किया गया है। पुस्तक में लोककथाओं के कथावस्तु, चरित्र, संवाद, भाषा-शैली और उद्देश्य जैसे तात्त्विक पक्षों के साथ ईश्वर की अवधारणा, पूजा-पाठ, पर्व-त्योहार, संस्कार तथा जीवन-जीने की कला जैसे सांस्कृतिक पक्षों का अध्ययन किया गया है। इसके अतिरिक्त पंचपरगनिया लोककथाओं का वर्गीकरण, उनके साहित्यिक पक्ष तथा उनमें प्रतिबिंबित संस्कृति का भी विस्तृत विवेचन किया गया है। पंचपरगनिया लोककथा, लोकसंस्कृति एवं लोकसाहित्य के अध्ययन और शोध के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।

ISBN : 978-93-855595-69-1 प्रथम संस्करण : 2017
पुरखा पंचपरगनिया लोककथा पुस्तक का आवरण – पराग किशोर सिंह
लोककथा

पुरखा

📖 28 पंचपरगनिया लोककथाओं का संकलन
संकलन-संपादन: पराग किशोर सिंह प्रकाशक: झारखण्ड झरोखा प्रथम संस्करण: 2015 ISBN: 978-93-85595-37-0
पुस्तक परिचय देखें

‘पुरखा’ पंचपरगनिया लोककथाओं का संग्रह है, जिसका संकलन-संपादन पराग किशोर सिंह ने किया है। पुस्तक में पंचपरगनिया की मौखिक लोककथा परंपरा से संबंधित कुल 28 लोककथाएँ संकलित हैं।

पुस्तक की विषय-सूची में ‘जिमुतबाहन (जितिआ)’, ‘करम देव केर बरत कथा’, ‘दुई कोढ़ी’, ‘बुइध बड़े न धन’, ‘पाप-भग’, ‘रूखी आर सीता माता’, ‘राजा आर सात रानी’, ‘केंवट आर केंवटाइन’, ‘पाँच भाई’ सहित अनेक लोककथाएँ सम्मिलित हैं।

यह संग्रह पंचपरगनिया लोककथा परंपरा के विविध कथानकों को एक स्थान पर प्रस्तुत करता है। इसलिए पंचपरगनिया लोक साहित्य, लोककथा और मौखिक परंपरा के अध्ययन एवं शोध की दृष्टि से यह पुस्तक उपयोगी संदर्भ सामग्री है।

पुस्तक का प्रथम संस्करण 2015 में झारखण्ड झरोखा से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-93-85595-37-0 है।

पंचपरगनिया लोकगीतों में जनजीवन पुस्तक का आवरण – डॉ. अम्बिका स्वाँसी
शोध ग्रंथ

पंचपरगनिया लोकगीतों में जनजीवन

🎓 डॉ. अम्बिका स्वाँसी के शोध-प्रबंध पर आधारित पुस्तक
लेखक: डॉ. अम्बिका स्वाँसी प्रकाशक: झारखण्ड झरोखा प्रथम संस्करण: 2015 ISBN: 978-93-85595-33-2
पुस्तक परिचय देखें

‘पंचपरगनिया लोकगीतों में जनजीवन’ डॉ. अम्बिका स्वाँसी के शोध-प्रबंध पर आधारित शोध ग्रंथ है। इसमें पंचपरगनिया लोकगीतों के विभिन्न रूपों के माध्यम से जनजीवन का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

पुस्तक की विषय-सूची के अनुसार अध्ययन को आठ अध्यायों में व्यवस्थित किया गया है। इसमें लोकगीत की परिभाषा, उद्भव एवं विकास, पंचपरगनिया लोकगीतों का सामान्य परिचय और उनका वर्गीकरण जैसे आधारभूत विषय शामिल हैं।

पुस्तक में पंचपरगनिया लोकगीतों में अभिव्यक्त जनजीवन का विशेष अध्ययन किया गया है। पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक तथा समसामयिक जीवन के साथ संस्कार लोकगीतों और ऋतु के आधार पर प्रचलित लोकगीतों का भी विवेचन किया गया है।

इसके अतिरिक्त स्त्री-पुरुषों से संबंधित पंचपरगनिया लोकगीतों, शोध-निष्कर्ष तथा शब्दार्थ, सामग्री-गीत स्रोत और संदर्भ ग्रंथ-सूची जैसे परिशिष्ट भी पुस्तक में सम्मिलित हैं। इस दृष्टि से यह पंचपरगनिया लोकगीत और लोकजीवन के अध्ययन एवं शोध के लिए महत्त्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।

पुस्तक का प्रथम संस्करण 2015 में झारखण्ड झरोखा से प्रकाशित हुआ तथा इसका ISBN 978-93-85595-33-2 है।

पंचपरगनिया लोकगीत पुस्तक का आवरण – डॉ. अम्बिका स्वाँसी
लोकगीत

पंचपरगनिया लोकगीत

🎵 पंचपरगनिया लोकगीतों का संकलन एवं संपादन
संकलन एवं संपादन: डॉ. अम्बिका स्वाँसी प्रकाशक: झारखण्ड झरोखा, राँची प्रथम संस्करण: 2015 ISBN: 978-93-85595-36-3
पुस्तक परिचय देखें

‘पंचपरगनिया लोकगीत’ डॉ. अम्बिका स्वाँसी द्वारा संकलित एवं संपादित पंचपरगनिया लोकगीतों का संग्रह है। इसमें पंचपरगनिया समाज में प्रचलित विभिन्न अवसरों, पर्वों, संस्कारों और सामाजिक संबंधों से जुड़े लोकगीतों को संकलित किया गया है।

पुस्तक की विषय-सूची में 30 विषय/श्रेणियों के अंतर्गत लोकगीत दिए गए हैं। इनमें विवाह गीत, खेती-किसानी, श्रम गीत, मनसा पूजा के लोकगीत, करम गीत, टुसू गीत तथा छऊ नाच के गीत आदि शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त पुस्तक में पति-पत्नी, माँ-बेटी, बाप-बेटी, माँ-बेटा, भाई-बहिन, सास-पुतहू तथा अन्य पारिवारिक और सामाजिक संबंधों से जुड़े गीत भी संकलित हैं। इस कारण यह संग्रह पंचपरगनिया लोकगीत परंपरा और लोकजीवन के अध्ययन के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री प्रस्तुत करता है।

पुस्तक का प्रथम संस्करण 2015 में झारखण्ड झरोखा, राँची से प्रकाशित हुआ तथा इसका ISBN 978-93-85595-36-3 है।

साहित्यकार एवं कवि परिचय

आधुनिक पंचपरगनिया साहित्यकार आर कलाकार पुस्तक का आवरण – डॉ. पराग किशोर सिंह
साहित्यकार एवं कवि परिचय

आधुनिक पंचपरगनिया साहित्यकार आर कलाकार

✍️ लेखक : डॉ. पराग किशोर सिंह 🏛️ प्रकाशक : झारखण्ड झरोखा 📅 प्रथम संस्करण : 2017
पुस्तक के बारे में जानें

‘आधुनिक पंचपरगनिया साहित्यकार आर कलाकार’ में पंचपरगनिया भाषा-साहित्य से जुड़े विभिन्न साहित्यकारों एवं कलाकारों का परिचय प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक की विषय-सूची में कुल 27 साहित्यकारों एवं कलाकारों को स्थान दिया गया है। इनके माध्यम से पंचपरगनिया साहित्य एवं कला क्षेत्र से जुड़े रचनाकारों के परिचय और योगदान की जानकारी प्राप्त होती है। पंचपरगनिया साहित्यकारों एवं कलाकारों के अध्ययन तथा संदर्भ के लिए यह पुस्तक उपयोगी है।

ISBN : 978-93-85595-73-8 प्रथम संस्करण : 2017 द्वितीय संस्करण : 2019

मध्यकालीन साहित्य

पंचपरगनिया मध्यकालीन कबि आर उनखर रचना पुस्तक का आवरण – पराग किशोर सिंह
मध्यकालीन साहित्य

पंचपरगनिया मध्यकालीन कबि आर उनखर रचना

✍️ लेखक : पराग किशोर सिंह 🏛️ प्रकाशक : झारखण्ड झरोखा 📅 प्रथम संस्करण : 2015
पुस्तक के बारे में जानें

‘पंचपरगनिया मध्यकालीन कबि आर उनखर रचना’ में पंचपरगनिया के मध्यकालीन कवियों एवं उनकी रचनाओं का परिचय प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में बरजुराम ताँती, बिनन्द सिंह, गउरांग सिंह, रामकिसन’ गांगुली, उदय, दीना ताँती, नरत्तम सिंह, नाराइन सिंह, धूम सिंह, कालिया, हरि मछुआ, राधुआ, खुदीराम सिंह, बिदुमनी, अचराज सिंह, कमला मुंडा तथा भवप्रीता नंद ओझा सहित विभिन्न रचनाकारों को स्थान दिया गया है। पंचपरगनिया के मध्यकालीन कवियों और उनकी साहित्यिक परंपरा के अध्ययन एवं संदर्भ के लिए यह पुस्तक उपयोगी है।

ISBN : 978-93-85595-40-0 प्रथम संस्करण : 2015 संस्करण : 2019

महाकाव्य

सिबुबारात पंचपरगनिया महाकाव्य पुस्तक का आवरण – राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’
महाकाव्य पंचपरगनिया का एकमात्र महाकाव्य

सिबुबारात

📖 पंचपरगना की भाषा, साहित्य एवं संस्कृति पर आधारित महाकाव्य
रचनाकार: राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’ प्रकाशक: झारखण्ड झरोखा प्रथम संस्करण: 2026 पृष्ठ: 793 ISBN: 978-93-94279-68-1
पुस्तक परिचय देखें

‘सिबुबारात’ राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’ द्वारा रचित पंचपरगनिया भाषा का महाकाव्य है। यह पंचपरगनिया भाषा में रचित एकमात्र महाकाव्य के रूप में विशेष महत्त्व रखता है।

‘सिबुबारात’ नाम अपने आप में संपूर्ण पंचपरगना क्षेत्र का बोध कराता है—‘सि’ से सिल्ली, ‘बु’ से बुण्डू, ‘बा’ से बारेन्दा, ‘रा’ से राहे और ‘त’ से तमाड़। इस प्रकार कृति का नाम पंचपरगना की क्षेत्रीय एवं सांस्कृतिक पहचान को एक सूत्र में प्रस्तुत करता है।

महाकाव्य की विषय-वस्तु को नौ पालाओं— चिन्हाप पाला, देवथान पाला, परब पाला, पूजन पाला, कबि पाला, साहितकार पाला, सांसकिरतिक पाला, संसकार पाला और सांग’ पाला— में व्यवस्थित किया गया है।

इन पालाओं के माध्यम से पंचपरगना क्षेत्र के धार्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं संस्कारगत जीवन के विविध पक्षों को प्रस्तुत किया गया है। लगभग 793 पृष्ठों तक विस्तृत यह कृति पंचपरगनिया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के अध्ययन की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।

काइब

नावा सोंच पंचपरगनिया काइब पुस्तक का आवरण – राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’
काइब

नावा सोंच

📖 पंचपरगनिया काइब
लिख’इआ: राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’ प्रथम संस्करण: अप्रैल 2012 मुद्रण: सुमुद्रण, राँची परकासन: पंचपरगनिया भाषा विकास केन्द्रीय समिति, बुण्डू, राँची (झारखण्ड)
पुस्तक परिचय देखें

‘नावा सोंच’ राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’ द्वारा रचित पंचपरगनिया काइब की पुस्तक है। पुस्तक में कुल 20 रचनाएँ संकलित हैं, जिनके माध्यम से सामाजिक जीवन, मानवीय संवेदना, जागरूकता, प्रकृति, क्षेत्रीय अस्मिता तथा जीवन के विविध अनुभवों को अभिव्यक्ति मिली है।

पुस्तक की अनुक्रमणिका में ‘पाँच परगना’, ‘बीर बिरसा’, ‘दुखेक काथा’, ‘बेथा’, ‘दरद’, ‘चेठा हऐक’, ‘माँए’, ‘जुआन आर जबान’, ‘नासन’, ‘जागेक सुर’, ‘आबाहान’, ‘सदभावनाक फसल’, ‘गरजन’, ‘नावा सोंच’, ‘ज्योतिलाल महादानी’, ‘जिनगानी’, ‘गुलाँची’, ‘उटा कन ठाँइ’, ‘सालाम’ तथा ‘झारखण्डी गूँज’ जैसी रचनाएँ शामिल हैं।

रचनाओं के शीर्षकों से पुस्तक में पाँचपरगना और झारखण्ड की क्षेत्रीय चेतना के साथ सामाजिक सरोकार, प्रेरणा, मानवीय भाव-बोध और जागरण के विविध स्वर दिखाई देते हैं। इस दृष्टि से ‘नावा सोंच’ आधुनिक पंचपरगनिया काइब के अध्ययन और पंचपरगनिया साहित्य की रचनात्मक प्रवृत्तियों को समझने के लिए उपयोगी कृति है।

पुस्तक का प्रथम संस्करण अप्रैल 2012 में प्रकाशित हुआ। इसका मुद्रण सुमुद्रण, राँची तथा परकासन पंचपरगनिया भाषा विकास केन्द्रीय समिति, बुण्डू, राँची (झारखण्ड) द्वारा किया गया।

जागरण पंचपरगनिया काइब पुस्तक का आवरण – पराग किशोर सिंह
काइब

जागरण

📖 पंचपरगनिया काइब • 50 रचनाओं का संकलन
रचनाकार: पराग किशोर सिंह प्रकाशक: झारखण्ड झरोखा प्रथम संस्करण: 2015 ISBN: 978-93-85595-39-4
पुस्तक परिचय देखें

‘जागरण’ पराग किशोर सिंह द्वारा रचित पंचपरगनिया काइब की पुस्तक है। इसका प्रथम संस्करण 2015 में प्रकाशित हुआ।

पुस्तक की विषय-सूची में कुल 50 रचनाएँ संकलित हैं। इन रचनाओं में सामाजिक, सांस्कृतिक, मानवीय तथा समसामयिक विषयों से संबंधित विविध प्रसंग दिखाई देते हैं।

पुस्तक का प्रकाशन झारखण्ड झरोखा द्वारा किया गया है तथा इसका ISBN 978-93-85595-39-4 है। पंचपरगनिया काइब और आधुनिक पंचपरगनिया साहित्य के अध्ययन एवं संदर्भ की दृष्टि से यह एक उपयोगी कृति है।

उपन्यास

इंजत पंचपरगनिया उपन्यास पुस्तक का आवरण – राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’
उपन्यास

इंजत

📖 राजकिशोर सिंह का पहला पंचपरगनिया उपन्यास
लिख’इआ: राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’ प्रथम संस्करण: अप्रैल 2012 मुद्रण: सुमुद्रण, राँची परकासन: पंचपरगनिया भाषा विकास केन्द्रीय समिति, बुण्डू, राँची (झारखण्ड)
पुस्तक परिचय देखें

‘इंजत’ राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’ द्वारा रचित पंचपरगनिया उपन्यास है। लेखक ने पुस्तक की ‘दुम कथा’ में इसे अपना पहला पंचपरगनिया उपन्यास बताया है।

लेखक के अनुसार इस उपन्यास की कथा अंधविश्वास तथा सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन से जुड़ी हुई है। इसमें गाँव और समाज से संबंधित घटनाओं को कथा के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

पुस्तक का प्रथम संस्करण अप्रैल 2012 में प्रकाशित हुआ। इसका मुद्रण सुमुद्रण, राँची से तथा प्रकाशन पंचपरगनिया भाषा विकास केन्द्रीय समिति, बुण्डू, राँची (झारखण्ड) द्वारा किया गया। पंचपरगनिया उपन्यास साहित्य के अध्ययन एवं संदर्भ की दृष्टि से यह एक महत्त्वपूर्ण कृति है।

निबंध

तुलसी-चउरा पंचपरगनिया निबंध पुस्तक का आवरण – राजकिशोर सिंह ‘बुँडूआर’
निबंध

तुलसी-चउरा

📖 पंचपरगनिया भाषा, साहित्य, लोक-संस्कृति एवं सामाजिक विषयों पर आधारित निबंध
रचनाकार: राजकिशोर सिंह ‘बुँडूआर’ प्रकाशक: झारखण्ड झरोखा प्रथम संस्करण: 2015 ISBN: 978-93-85595-42-4
पुस्तक परिचय देखें

‘तुलसी-चउरा’ राजकिशोर सिंह ‘बुँडूआर’ द्वारा रचित पंचपरगनिया निबंध की पुस्तक है। पुस्तक में पंचपरगनिया भाषा, साहित्य, लोक-संस्कृति तथा सामाजिक जीवन से जुड़े विविध विषयों को स्थान दिया गया है।

पुस्तक की विषय-सूची में कुल 25 विषय/निबंध शामिल हैं। इनमें ‘पाँचपरगना : साहित आर संगीत’, ‘लोक साहितेक महत’, ‘मातरि-भासा’, ‘पंचपरगनिया साहित केर भक्ति काल’, ‘नाचनी’, ‘सिब-सकति’, ‘तुलसी-चउरा’, ‘सामुदायिक बिकास’, ‘ईरखा’, ‘भारत आर विज्ञान’ जैसे विविध विषय सम्मिलित हैं।

इसके अतिरिक्त पुस्तक में लोक-कथा, पंचपरगनिया भाषा-साहित्य, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों से संबंधित अन्य आलेख भी संकलित हैं। इस कारण यह पुस्तक पंचपरगनिया भाषा, साहित्य और लोक-संस्कृति के विविध पक्षों के अध्ययन के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री प्रस्तुत करती है।

पुस्तक का प्रथम संस्करण 2015 में झारखण्ड झरोखा से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-93-85595-42-4 है।

पाँचपरगनाक साहितिक आर सांसकिरतिक चिन्हाप पुस्तक का आवरण – पराग किशोर सिंह
निबंध

पाँचपरगनाक साहितिक आर सांसकिरतिक चिन्हाप

📖 पंचपरगनिया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति से संबंधित 24 निबंध
लेखक: पराग किशोर सिंह प्रकाशक: अखिल पब्लिकेशन प्रथम संस्करण: 2014 ISBN: 978-93-81088-08-1
पुस्तक परिचय देखें

‘पाँचपरगनाक साहितिक आर सांसकिरतिक चिन्हाप’ पराग किशोर सिंह द्वारा रचित पंचपरगनिया निबंध-संग्रह है। पुस्तक में पंचपरगनिया भाषा, साहित्य और संस्कृति के विभिन्न पक्षों से संबंधित कुल 24 निबंध संकलित हैं।

पुस्तक में पंचपरगनिया भाषा, झारखंडी भाषाओं में पंचपरगनिया की स्थिति, भाषा पर पड़ने वाले प्रभाव, लोकगीत, लोकसाहित्य, मध्यकालीन कवि एवं काव्य, गद्य साहित्य तथा आधुनिक साहित्य से संबंधित विषयों पर विचार किया गया है।

इसके साथ ही पंचपरगना की लोक-संस्कृति से जुड़े नाच-डेग, पारंपरिक वाद्य, मंदिर, पर्व और पूजा जैसे विषय भी इसमें सम्मिलित हैं। इस प्रकार यह पुस्तक पंचपरगनिया भाषा-साहित्य के साथ पंचपरगना की सांस्कृतिक परंपराओं के अध्ययन के लिए भी उपयोगी संदर्भ सामग्री है।

पुस्तक का प्रथम संस्करण 2014 में अखिल पब्लिकेशन से प्रकाशित हुआ तथा इसका ISBN 978-93-81088-08-1 है।

गद्य

नुपूर पुस्तक का आवरण – स्व. ज्योतिलाल महादानी, पंचपरगनिया अनुवाद डॉ. अम्बिका स्वाँसी
गद्य

नुपूर

📖 पंचपरगनिया के प्रथम गद्यकार माने जाने वाले स्व. ज्योतिलाल महादानी की आरंभिक गद्य रचनाओं का संग्रह
मूल रचनाकार: स्व. ज्योतिलाल महादानी पंचपरगनिया अनुवाद: डॉ. अम्बिका स्वाँसी प्रकाशक: झारखण्ड झरोखा, राँची प्रथम संस्करण: 2015 ISBN: 978-93-85595-34-9
पुस्तक परिचय देखें

‘नुपूर’ स्व. ज्योतिलाल महादानी की आरंभिक गद्य रचनाओं का संग्रह है। उनकी ये रचनाएँ राँची से प्रकाशित ‘आदिवासी पत्रिका’ में प्रकाशित होती रही थीं।

पुस्तक के ‘आपन कथा’ में डॉ. अम्बिका स्वाँसी ने स्व. ज्योतिलाल महादानी को पंचपरगनिया भाषा के पहले गद्यकार के रूप में मान्य बताया है। इस कारण उनकी रचनाओं का पंचपरगनिया गद्य-साहित्य के इतिहास में विशेष महत्त्व है।

महादानी जी की रचनाएँ अलग-अलग स्थानों पर बिखरी हुई थीं। पंचपरगनिया भाषा के अध्ययन के क्रम में यहाँ के बुद्धिजीवी वर्ग ने मिलकर ‘आदिवासी पत्रिका’ में प्रकाशित उनकी उपलब्ध रचनाओं को एकत्र किया और उनकी पांडुलिपि तैयार कर उसका नाम ‘नुपूर’ रखा।

बाद में यह पांडुलिपि डॉ. अम्बिका स्वाँसी तक पहुँची। पंचपरगनिया पाठकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इन रचनाओं का हिंदी से पंचपरगनिया में अनुवाद किया। अनुवाद करते समय मूल रचनाओं के भाव और विचार को यथासंभव सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया।

इस दृष्टि से ‘नुपूर’ पंचपरगनिया गद्य-साहित्य के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण कृति है। इसमें सुरक्षित रचनाएँ पंचपरगनिया गद्य के आरंभिक स्वरूप और उसकी साहित्यिक विकास-यात्रा को समझने के लिए विशेष महत्त्व रखती हैं।

पुस्तक का प्रथम संस्करण 2015 में झारखण्ड झरोखा, राँची से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-93-85595-34-9 है।

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लेखक के अनुसार देखें

लेखक के नाम के अनुसार उनकी उपलब्ध पंचपरगनिया पुस्तकों का परिचय एवं Book Preview देखें।

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Book Preview संबंधी सूचना

पुस्तकों के Preview के संबंध में आवश्यक जानकारी

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Book Preview में पूरी पुस्तक उपलब्ध नहीं कराई जाती। इसमें केवल Front Cover, Copyright/Publication Page, Contents/Index तथा Back Cover जैसे सीमित पृष्ठ शैक्षणिक, पुस्तक-परिचय एवं संदर्भ उद्देश्य से प्रस्तुत किए जाते हैं।

जिन पुस्तकों का Book Preview उपलब्ध है, उन्हें संबंधित लेखक अथवा अधिकारधारी से प्राप्त अनुमति के अनुसार प्रस्तुत किया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

पंचपरगनिया पुस्तक परिचय एवं Book Preview से संबंधित सामान्य प्रश्न

1. ONLINE PPG पर पंचपरगनिया पुस्तकों को कैसे खोजें? +

इस पृष्ठ पर उपलब्ध “पुस्तक खोजें” विकल्प में पुस्तक या लेखक का नाम लिखकर संबंधित पुस्तक खोजी जा सकती है। पुस्तकों को विधा तथा लेखक के अनुसार भी देखा जा सकता है।

2. क्या ONLINE PPG पर पूरी पुस्तक PDF में उपलब्ध है? +

नहीं। यहाँ Book Preview के रूप में पूरी पुस्तक उपलब्ध नहीं कराई जाती। इसका उद्देश्य पुस्तक का परिचय एवं प्रकाशन संबंधी जानकारी पाठकों तक पहुँचाना है।

3. Book Preview में कौन-कौन से पृष्ठ उपलब्ध होते हैं? +

सामान्यतः Book Preview में Front Cover, Copyright/Publication Page, Contents/Index और Back Cover जैसे सीमित पृष्ठ उपलब्ध कराए जाते हैं।

4. Book Preview किस उद्देश्य से उपलब्ध कराया जाता है? +

Book Preview का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं सामान्य पाठकों को पंचपरगनिया भाषा-साहित्य की पुस्तकों, उनकी विषय-वस्तु और प्रकाशन संबंधी जानकारी से परिचित कराना है।

5. क्या Book Preview लेखक की अनुमति से उपलब्ध कराया गया है? +

जिन पुस्तकों के साथ Book Preview उपलब्ध दिखाया गया है, उनका सीमित Preview संबंधित लेखक अथवा अधिकारधारी से प्राप्त अनुमति के अनुसार प्रस्तुत किया गया है।

6. क्या इस सूची में आगे और पंचपरगनिया पुस्तकें जोड़ी जाएँगी? +

हाँ। पंचपरगनिया भाषा एवं साहित्य से संबंधित पुस्तकों की जानकारी इस डिजिटल पुस्तक-सूची में क्रमशः जोड़ी जाती रहेगी। उपलब्धता एवं अनुमति के अनुसार नई पुस्तकों का परिचय और सीमित Book Preview भी शामिल किया जा सकता है।

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