पंचपरगनिया पुस्तक परिचय Panchpargania Books
पंचपरगनिया भाषा एवं साहित्य से संबंधित पुस्तकों की जानकारी विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं पाठकों तक व्यवस्थित रूप से पहुँचाने का एक शैक्षणिक प्रयास।
यहाँ विभिन्न विधाओं की पंचपरगनिया पुस्तकों का परिचय, लेखक/संपादक, प्रकाशन संबंधी जानकारी एवं विषय-वस्तु का विवरण उपलब्ध कराया जाएगा। जिन पुस्तकों के लिए लेखक अथवा अधिकारधारी की अनुमति प्राप्त है, उनका सीमित Book Preview भी शैक्षणिक एवं संदर्भ उद्देश्य से उपलब्ध कराया जाएगा।
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लोक साहित्य

पंचपरगनिया लोक साहित्य
पुस्तक के बारे में जानें
‘पंचपरगनिया लोक साहित्य’ में पंचपरगनिया भाषा एवं लोकसाहित्य का परिचय प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में लोकगीत, लोककथा तथा मुहावरा, कहावत, पहेली और मंत्र जैसे प्रकीर्ण लोकसाहित्य के साथ पंचपरगनिया लोकगीतों के स्वरूप, क्षेत्र-विस्तार, वर्गीकरण और विशेषताओं का विवेचन किया गया है। पंचपरगनिया लोकसाहित्य के अध्ययन के लिए यह एक उपयोगी संदर्भ पुस्तक है।

पंचपरगनिया लोकगीतों में सौन्दर्य-बोध
पुस्तक के बारे में जानें
‘पंचपरगनिया लोकगीतों में सौन्दर्य-बोध’ में सौन्दर्य-बोध की अवधारणा के साथ पंचपरगनिया लोकगीतों में निहित सौन्दर्य का अध्ययन किया गया है। पुस्तक में संस्कार गीतों, पर्व-त्योहार गीतों एवं विविध लोकगीतों के सौन्दर्य-बोध का विवेचन करते हुए भाव-सौन्दर्य और कला-सौन्दर्य की विशेषताओं को रेखांकित किया गया है। साथ ही पंचपरगनिया लोकगीतों की उपलब्धियों और भविष्य पर भी विचार किया गया है।

पंचपरगनिया लोककथाओं का साहित्यिक और सांस्कृतिक अध्ययन
पुस्तक के बारे में जानें
‘पंचपरगनिया लोककथाओं का साहित्यिक और सांस्कृतिक अध्ययन’ डॉ. पराग किशोर सिंह के शोध-प्रबंध पर आधारित पुस्तक है। इसमें पंचपरगनिया भाषा के सामान्य परिचय के साथ लोककथाओं का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से विश्लेषण किया गया है। पुस्तक में लोककथाओं के कथावस्तु, चरित्र, संवाद, भाषा-शैली और उद्देश्य जैसे तात्त्विक पक्षों के साथ ईश्वर की अवधारणा, पूजा-पाठ, पर्व-त्योहार, संस्कार तथा जीवन-जीने की कला जैसे सांस्कृतिक पक्षों का अध्ययन किया गया है। इसके अतिरिक्त पंचपरगनिया लोककथाओं का वर्गीकरण, उनके साहित्यिक पक्ष तथा उनमें प्रतिबिंबित संस्कृति का भी विस्तृत विवेचन किया गया है। पंचपरगनिया लोककथा, लोकसंस्कृति एवं लोकसाहित्य के अध्ययन और शोध के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।

पुरखा
पुस्तक परिचय देखें
‘पुरखा’ पंचपरगनिया लोककथाओं का संग्रह है, जिसका संकलन-संपादन पराग किशोर सिंह ने किया है। पुस्तक में पंचपरगनिया की मौखिक लोककथा परंपरा से संबंधित कुल 28 लोककथाएँ संकलित हैं।
पुस्तक की विषय-सूची में ‘जिमुतबाहन (जितिआ)’, ‘करम देव केर बरत कथा’, ‘दुई कोढ़ी’, ‘बुइध बड़े न धन’, ‘पाप-भग’, ‘रूखी आर सीता माता’, ‘राजा आर सात रानी’, ‘केंवट आर केंवटाइन’, ‘पाँच भाई’ सहित अनेक लोककथाएँ सम्मिलित हैं।
यह संग्रह पंचपरगनिया लोककथा परंपरा के विविध कथानकों को एक स्थान पर प्रस्तुत करता है। इसलिए पंचपरगनिया लोक साहित्य, लोककथा और मौखिक परंपरा के अध्ययन एवं शोध की दृष्टि से यह पुस्तक उपयोगी संदर्भ सामग्री है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2015 में झारखण्ड झरोखा से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-93-85595-37-0 है।

पंचपरगनिया लोकगीतों में जनजीवन
पुस्तक परिचय देखें
‘पंचपरगनिया लोकगीतों में जनजीवन’ डॉ. अम्बिका स्वाँसी के शोध-प्रबंध पर आधारित शोध ग्रंथ है। इसमें पंचपरगनिया लोकगीतों के विभिन्न रूपों के माध्यम से जनजीवन का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक की विषय-सूची के अनुसार अध्ययन को आठ अध्यायों में व्यवस्थित किया गया है। इसमें लोकगीत की परिभाषा, उद्भव एवं विकास, पंचपरगनिया लोकगीतों का सामान्य परिचय और उनका वर्गीकरण जैसे आधारभूत विषय शामिल हैं।
पुस्तक में पंचपरगनिया लोकगीतों में अभिव्यक्त जनजीवन का विशेष अध्ययन किया गया है। पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक तथा समसामयिक जीवन के साथ संस्कार लोकगीतों और ऋतु के आधार पर प्रचलित लोकगीतों का भी विवेचन किया गया है।
इसके अतिरिक्त स्त्री-पुरुषों से संबंधित पंचपरगनिया लोकगीतों, शोध-निष्कर्ष तथा शब्दार्थ, सामग्री-गीत स्रोत और संदर्भ ग्रंथ-सूची जैसे परिशिष्ट भी पुस्तक में सम्मिलित हैं। इस दृष्टि से यह पंचपरगनिया लोकगीत और लोकजीवन के अध्ययन एवं शोध के लिए महत्त्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2015 में झारखण्ड झरोखा से प्रकाशित हुआ तथा इसका ISBN 978-93-85595-33-2 है।

पंचपरगनिया लोकगीत
पुस्तक परिचय देखें
‘पंचपरगनिया लोकगीत’ डॉ. अम्बिका स्वाँसी द्वारा संकलित एवं संपादित पंचपरगनिया लोकगीतों का संग्रह है। इसमें पंचपरगनिया समाज में प्रचलित विभिन्न अवसरों, पर्वों, संस्कारों और सामाजिक संबंधों से जुड़े लोकगीतों को संकलित किया गया है।
पुस्तक की विषय-सूची में 30 विषय/श्रेणियों के अंतर्गत लोकगीत दिए गए हैं। इनमें विवाह गीत, खेती-किसानी, श्रम गीत, मनसा पूजा के लोकगीत, करम गीत, टुसू गीत तथा छऊ नाच के गीत आदि शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त पुस्तक में पति-पत्नी, माँ-बेटी, बाप-बेटी, माँ-बेटा, भाई-बहिन, सास-पुतहू तथा अन्य पारिवारिक और सामाजिक संबंधों से जुड़े गीत भी संकलित हैं। इस कारण यह संग्रह पंचपरगनिया लोकगीत परंपरा और लोकजीवन के अध्ययन के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री प्रस्तुत करता है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2015 में झारखण्ड झरोखा, राँची से प्रकाशित हुआ तथा इसका ISBN 978-93-85595-36-3 है।

पंचपरगनिया प्रकीर्ण लोक साहित्य
पुस्तक परिचय देखें
‘पंचपरगनिया प्रकीर्ण लोक साहित्य’ पंचपरगनिया लोक साहित्य की विविध प्रकीर्ण विधाओं से संबंधित सामग्री का संग्रह है। इसका संकलन दीनबन्धु महतो एवं पुष्पा देवी ने किया है।
पुस्तक के ‘दुइ काथा’ में लोक साहित्य के विभिन्न रूपों की चर्चा करते हुए उपलब्ध सामग्री को एकत्र कर पुस्तकाकार रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया है।
इसमें पंचपरगनिया लोक साहित्य के अंतर्गत कहनी/काथा, मुहावरा, सलुक, मंतर’, जान-कहनी, उलटा काथा आदि विविध लोक-साहित्यिक रूपों का उल्लेख एवं संकलन किया गया है।
इस दृष्टि से यह पुस्तक पंचपरगनिया लोक साहित्य की विविध प्रकीर्ण विधाओं और लोक परंपरा से संबंधित सामग्री को एक स्थान पर प्रस्तुत करने वाला उपयोगी संकलन है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2017 में झारखण्ड झरोखा, राँची से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-93-85595-75-2 है।

पंचपरगनिया ल’क कहनि
पुस्तक परिचय देखें
‘पंचपरगनिया ल’क कहनि’ पंचपरगनिया लोककथाओं का संग्रह है। इसका संकलन/संपादन दीनबन्धु महतो एवं पुष्पा कुमारी ने किया है।
पुस्तक के ‘दुइ काथा’ में पंचपरगनिया समाज में प्रचलित लोककथाओं और उनकी विविधता की चर्चा की गई है। इसमें अलग-अलग विषय और स्वरूप की लोककथाओं को एकत्र कर पुस्तकाकार रूप में प्रस्तुत किया गया है।
संग्रह में राजा-रानी, धार्मिक, सामाजिक, ऐतिहासिक, भूत-प्रेत, हास्य तथा अन्य लोकजीवन से संबंधित कथाओं जैसे विविध कथा-रूपों को स्थान दिया गया है।
पुस्तक की विषय-सूची में अनेक लोककथाएँ दी गई हैं, जिनसे पंचपरगनिया लोककथा परंपरा की विषयगत विविधता का परिचय मिलता है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2016 में प्रकाशित हुआ तथा 2019 में इसका अगला संस्करण प्रकाशित हुआ। प्रकाशक झारखण्ड झरोखा, राँची है और इसका ISBN 978-93-85595-76-9 है।

पंचपरगनिया लोककथा
पुस्तक परिचय देखें
‘पंचपरगनिया लोककथा’ पंचपरगनिया लोककथा परंपरा से संबंधित एक संग्रह है। इसका संकलन एवं संपादन परमानन्द महतो ने किया है।
पुस्तक की विषय-सूची में कुल 34 लोककथाएँ सम्मिलित हैं। ये कथाएँ पंचपरगनिया लोकजीवन और मौखिक कथा-परंपरा के विविध रूपों का परिचय कराती हैं।
संग्रह में अलग-अलग विषयों और पात्रों पर आधारित लोककथाएँ दी गई हैं। विषय-सूची में ‘सातबहिनी आर चरवाहा’, ‘किसान आर पेंड़की’, ‘एक राजा आर सात रानी’, ‘विषहरी आर पाँच परी’ तथा ‘मामा-भगिना’ जैसी कथाएँ सम्मिलित हैं।
इस प्रकार यह पुस्तक पंचपरगनिया लोककथाओं के अध्ययन, अध्यापन तथा लोक साहित्य के संदर्भ में उपयोगी संकलन प्रस्तुत करती है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2021 में पृथ्वी प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-81-86845-38-0 है।
कहानी साहित्य

पूस-पीठा
पुस्तक परिचय देखें
‘पूस-पीठा’ परमानन्द महतो का पंचपरगनिया कहानी-संग्रह है। पुस्तक में कुल 8 कहानियाँ संकलित हैं।
संग्रह में बखी डाइन, आँधी, पूस-पीठा, पारास आर सिमइर फूलेक सुगंध, बेटी, इन्साफ केर हाँक, अन्तर केर फेर और कांड’ कहानियाँ सम्मिलित हैं।
इन कहानियों के माध्यम से पंचपरगनिया कहानी-साहित्य की विविध विषय-वस्तु और रचनात्मक अभिव्यक्ति का परिचय प्राप्त होता है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण जून 2010 में प्रणेता प्रकाशन, कचहरी रोड, राँची से प्रकाशित हुआ।

चिती साँप
पुस्तक परिचय देखें
‘चिती साँप’ संतोष साहु ‘प्रीतम’ की आधुनिक पाँचपरगनिया कहानी की पुस्तक है। पुस्तक की विषय-सूची में कुल 21 रचनाएँ दी गई हैं।
पुस्तक में विभिन्न सामाजिक एवं मानवीय विषयों पर आधारित रचनाएँ संकलित हैं। इनमें पुस्तक की शीर्षक रचना ‘चिती साँप’ भी सम्मिलित है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2014 में झारखण्ड झरोखा, राँची से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-93-81720-74-5 है।
प्रकाशन विवरण के अनुसार यह पुस्तक पाँचपरगनिया साहित्य अकादमी द्वारा स्वीकृत है तथा इसका सर्वाधिकार लेखक के पास है।

जदि एसन हतक हले का हतक
पुस्तक परिचय देखें
‘जदि एसन हतक हले का हतक’ संतोष साहु ‘प्रीतम’ का पंचपरगनिया कहानी-संग्रह है। इस संग्रह में कुल 5 कहानियाँ सम्मिलित हैं।
संग्रह में बुधनी केर तीन राइत, मिस सुनीता केर स्वयंवर, छुआ केर तहें, प्रीति केर कहनी और जदि एसन हतक हले का हतक कहानियाँ संकलित हैं।
पुस्तक का प्रथम संस्करण दिसम्बर 2005 में प्रणेता प्रकाशन, कचहरी रोड, राँची से प्रकाशित हुआ।
पुस्तक के प्रकाशन विवरण के अनुसार यह पाँच परगनिया साहित्य अकादमी द्वारा स्वीकृत है तथा इसका सर्वाधिकार लेखकाधीन है।
साहित्यकार एवं कवि परिचय

आधुनिक पंचपरगनिया साहित्यकार आर कलाकार
पुस्तक के बारे में जानें
‘आधुनिक पंचपरगनिया साहित्यकार आर कलाकार’ में पंचपरगनिया भाषा-साहित्य से जुड़े विभिन्न साहित्यकारों एवं कलाकारों का परिचय प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक की विषय-सूची में कुल 27 साहित्यकारों एवं कलाकारों को स्थान दिया गया है। इनके माध्यम से पंचपरगनिया साहित्य एवं कला क्षेत्र से जुड़े रचनाकारों के परिचय और योगदान की जानकारी प्राप्त होती है। पंचपरगनिया साहित्यकारों एवं कलाकारों के अध्ययन तथा संदर्भ के लिए यह पुस्तक उपयोगी है।
मध्यकालीन साहित्य

पंचपरगनिया मध्यकालीन कबि आर उनखर रचना
पुस्तक के बारे में जानें
‘पंचपरगनिया मध्यकालीन कबि आर उनखर रचना’ में पंचपरगनिया के मध्यकालीन कवियों एवं उनकी रचनाओं का परिचय प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में बरजुराम ताँती, बिनन्द सिंह, गउरांग सिंह, रामकिसन’ गांगुली, उदय, दीना ताँती, नरत्तम सिंह, नाराइन सिंह, धूम सिंह, कालिया, हरि मछुआ, राधुआ, खुदीराम सिंह, बिदुमनी, अचराज सिंह, कमला मुंडा तथा भवप्रीता नंद ओझा सहित विभिन्न रचनाकारों को स्थान दिया गया है। पंचपरगनिया के मध्यकालीन कवियों और उनकी साहित्यिक परंपरा के अध्ययन एवं संदर्भ के लिए यह पुस्तक उपयोगी है।

पंचपरगनिया केर मध्य कालिन काइब – भाग 1
पुस्तक परिचय देखें
‘पंचपरगनिया केर मध्य कालिन काइब – भाग 1’ पंचपरगनिया के मध्यकालीन काव्य एवं गीत परंपरा से संबंधित रचनाओं का संग्रह है। इसका संकलन एवं संपादन दीनबन्धु महतो ने किया है।
पुस्तक में पंचपरगनिया के विभिन्न मध्यकालीन कवियों और रचनाकारों की उपलब्ध काव्य एवं गीत रचनाओं को संकलित कर पुस्तकाकार रूप में प्रस्तुत किया गया है।
इसकी विषय-सूची में कुल 44 प्रविष्टियाँ दी गई हैं। इनमें बरजुराम, दीनबन्धु, रामा, भवप्रीत, धूमसिंह, बिनन्द सिंह, शम्भु, जादु, उदय, हीरा, श्यामानंद आदि से संबंधित रचनाएँ सम्मिलित हैं।
पुस्तक के ‘आमुख’ में पंचपरगनिया की भक्ति-कालीन एवं मध्यकालीन काव्य-परंपरा तथा विभिन्न कवियों की उपलब्ध रचनाओं के संकलन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया है। इसे भाग 1 के रूप में प्रकाशित किया गया है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2014 में झारखण्ड झरोखा, राँची से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-93-81720-94-3 है।
महाकाव्य

सिबुबारात
पुस्तक परिचय देखें
‘सिबुबारात’ राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’ द्वारा रचित पंचपरगनिया भाषा का महाकाव्य है। यह पंचपरगनिया भाषा में रचित एकमात्र महाकाव्य के रूप में विशेष महत्त्व रखता है।
‘सिबुबारात’ नाम अपने आप में संपूर्ण पंचपरगना क्षेत्र का बोध कराता है—‘सि’ से सिल्ली, ‘बु’ से बुण्डू, ‘बा’ से बारेन्दा, ‘रा’ से राहे और ‘त’ से तमाड़। इस प्रकार कृति का नाम पंचपरगना की क्षेत्रीय एवं सांस्कृतिक पहचान को एक सूत्र में प्रस्तुत करता है।
महाकाव्य की विषय-वस्तु को नौ पालाओं— चिन्हाप पाला, देवथान पाला, परब पाला, पूजन पाला, कबि पाला, साहितकार पाला, सांसकिरतिक पाला, संसकार पाला और सांग’ पाला— में व्यवस्थित किया गया है।
इन पालाओं के माध्यम से पंचपरगना क्षेत्र के धार्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं संस्कारगत जीवन के विविध पक्षों को प्रस्तुत किया गया है। लगभग 793 पृष्ठों तक विस्तृत यह कृति पंचपरगनिया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के अध्ययन की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।
काइब

नावा सोंच
पुस्तक परिचय देखें
‘नावा सोंच’ राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’ द्वारा रचित पंचपरगनिया काइब की पुस्तक है। पुस्तक में कुल 20 रचनाएँ संकलित हैं, जिनके माध्यम से सामाजिक जीवन, मानवीय संवेदना, जागरूकता, प्रकृति, क्षेत्रीय अस्मिता तथा जीवन के विविध अनुभवों को अभिव्यक्ति मिली है।
पुस्तक की अनुक्रमणिका में ‘पाँच परगना’, ‘बीर बिरसा’, ‘दुखेक काथा’, ‘बेथा’, ‘दरद’, ‘चेठा हऐक’, ‘माँए’, ‘जुआन आर जबान’, ‘नासन’, ‘जागेक सुर’, ‘आबाहान’, ‘सदभावनाक फसल’, ‘गरजन’, ‘नावा सोंच’, ‘ज्योतिलाल महादानी’, ‘जिनगानी’, ‘गुलाँची’, ‘उटा कन ठाँइ’, ‘सालाम’ तथा ‘झारखण्डी गूँज’ जैसी रचनाएँ शामिल हैं।
रचनाओं के शीर्षकों से पुस्तक में पाँचपरगना और झारखण्ड की क्षेत्रीय चेतना के साथ सामाजिक सरोकार, प्रेरणा, मानवीय भाव-बोध और जागरण के विविध स्वर दिखाई देते हैं। इस दृष्टि से ‘नावा सोंच’ आधुनिक पंचपरगनिया काइब के अध्ययन और पंचपरगनिया साहित्य की रचनात्मक प्रवृत्तियों को समझने के लिए उपयोगी कृति है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण अप्रैल 2012 में प्रकाशित हुआ। इसका मुद्रण सुमुद्रण, राँची तथा परकासन पंचपरगनिया भाषा विकास केन्द्रीय समिति, बुण्डू, राँची (झारखण्ड) द्वारा किया गया।

जागरण
पुस्तक परिचय देखें
‘जागरण’ पराग किशोर सिंह द्वारा रचित पंचपरगनिया काइब की पुस्तक है। इसका प्रथम संस्करण 2015 में प्रकाशित हुआ।
पुस्तक की विषय-सूची में कुल 50 रचनाएँ संकलित हैं। इन रचनाओं में सामाजिक, सांस्कृतिक, मानवीय तथा समसामयिक विषयों से संबंधित विविध प्रसंग दिखाई देते हैं।
पुस्तक का प्रकाशन झारखण्ड झरोखा द्वारा किया गया है तथा इसका ISBN 978-93-85595-39-4 है। पंचपरगनिया काइब और आधुनिक पंचपरगनिया साहित्य के अध्ययन एवं संदर्भ की दृष्टि से यह एक उपयोगी कृति है।

बांबरा
पुस्तक परिचय देखें
‘बांबरा’ पंचपरगनिया कविता संग्रह है। इसका संकलन प्रो. दीन बन्धु महतो एवं प्रो. परमानन्द महतो ने किया है।
पुस्तक के आमुख में पंचपरगनिया की सांस्कृतिक एवं काव्य परंपरा के अंतर्गत प्रचलित गीतों और विभिन्न कवियों की रचनाओं को संकलित कर पुस्तकाकार रूप देने के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया है।
पुस्तक की विषय-सूची में कुल 29 प्रविष्टियाँ हैं। इनमें वन्दना, गणेश वन्दना, सरस्वती वन्दना, काली आराधना, दुर्गा वन्दना, शिव वन्दना, राम काव्य, सर्वदेवता वन्दना, निमाइ संन्यासि, अक्रूर संवाद, श्री कृष्ण, प्रेम गीत, बसंत विरह, राधा का विरह, आधुनिक गीत तथा चैतन्य काव्य आदि विषय सम्मिलित हैं।
संग्रह में भक्ति, प्रेम, विरह और आध्यात्मिक विषयों से संबंधित रचनाओं के साथ आधुनिक विषयों की रचनाओं को भी स्थान मिला है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2012 में झारखण्ड झरोखा, राँची से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-81-921537-2-8 है।
उपन्यास

इंजत
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‘इंजत’ राजकिशोर सिंह ‘बुण्डूआर’ द्वारा रचित पंचपरगनिया उपन्यास है। लेखक ने पुस्तक की ‘दुम कथा’ में इसे अपना पहला पंचपरगनिया उपन्यास बताया है।
लेखक के अनुसार इस उपन्यास की कथा अंधविश्वास तथा सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन से जुड़ी हुई है। इसमें गाँव और समाज से संबंधित घटनाओं को कथा के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण अप्रैल 2012 में प्रकाशित हुआ। इसका मुद्रण सुमुद्रण, राँची से तथा प्रकाशन पंचपरगनिया भाषा विकास केन्द्रीय समिति, बुण्डू, राँची (झारखण्ड) द्वारा किया गया। पंचपरगनिया उपन्यास साहित्य के अध्ययन एवं संदर्भ की दृष्टि से यह एक महत्त्वपूर्ण कृति है।

पारास केर फूल
पुस्तक परिचय देखें
‘पारास केर फूल’ संतोष साहु ‘प्रीतम’ का पंचपरगनिया उपन्यास है। पुस्तक में प्रवीण कुमार का नाम अनुवादक के रूप में अंकित है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 1985 तथा द्वितीय संस्करण 2013 में प्रकाशित हुआ। इसका प्रकाशन झारखण्ड झरोखा, राँची द्वारा किया गया है।
पुस्तक का ISBN 978-93-81720-51-6 है तथा प्रकाशन विवरण के अनुसार इसका सर्वाधिकार लेखक के पास है।
निबंध

तुलसी-चउरा
पुस्तक परिचय देखें
‘तुलसी-चउरा’ राजकिशोर सिंह ‘बुँडूआर’ द्वारा रचित पंचपरगनिया निबंध की पुस्तक है। पुस्तक में पंचपरगनिया भाषा, साहित्य, लोक-संस्कृति तथा सामाजिक जीवन से जुड़े विविध विषयों को स्थान दिया गया है।
पुस्तक की विषय-सूची में कुल 25 विषय/निबंध शामिल हैं। इनमें ‘पाँचपरगना : साहित आर संगीत’, ‘लोक साहितेक महत’, ‘मातरि-भासा’, ‘पंचपरगनिया साहित केर भक्ति काल’, ‘नाचनी’, ‘सिब-सकति’, ‘तुलसी-चउरा’, ‘सामुदायिक बिकास’, ‘ईरखा’, ‘भारत आर विज्ञान’ जैसे विविध विषय सम्मिलित हैं।
इसके अतिरिक्त पुस्तक में लोक-कथा, पंचपरगनिया भाषा-साहित्य, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों से संबंधित अन्य आलेख भी संकलित हैं। इस कारण यह पुस्तक पंचपरगनिया भाषा, साहित्य और लोक-संस्कृति के विविध पक्षों के अध्ययन के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री प्रस्तुत करती है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2015 में झारखण्ड झरोखा से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-93-85595-42-4 है।

पाँचपरगनाक साहितिक आर सांसकिरतिक चिन्हाप
पुस्तक परिचय देखें
‘पाँचपरगनाक साहितिक आर सांसकिरतिक चिन्हाप’ पराग किशोर सिंह द्वारा रचित पंचपरगनिया निबंध-संग्रह है। पुस्तक में पंचपरगनिया भाषा, साहित्य और संस्कृति के विभिन्न पक्षों से संबंधित कुल 24 निबंध संकलित हैं।
पुस्तक में पंचपरगनिया भाषा, झारखंडी भाषाओं में पंचपरगनिया की स्थिति, भाषा पर पड़ने वाले प्रभाव, लोकगीत, लोकसाहित्य, मध्यकालीन कवि एवं काव्य, गद्य साहित्य तथा आधुनिक साहित्य से संबंधित विषयों पर विचार किया गया है।
इसके साथ ही पंचपरगना की लोक-संस्कृति से जुड़े नाच-डेग, पारंपरिक वाद्य, मंदिर, पर्व और पूजा जैसे विषय भी इसमें सम्मिलित हैं। इस प्रकार यह पुस्तक पंचपरगनिया भाषा-साहित्य के साथ पंचपरगना की सांस्कृतिक परंपराओं के अध्ययन के लिए भी उपयोगी संदर्भ सामग्री है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2014 में अखिल पब्लिकेशन से प्रकाशित हुआ तथा इसका ISBN 978-93-81088-08-1 है।

पंचपरगनिया निबंध-संग्रह
पुस्तक परिचय देखें
‘पंचपरगनिया निबंध-संग्रह’ डॉ. करम चन्द्र अहीर एवं कैलाश सेठ द्वारा संपादित निबंध-संग्रह है। इसमें विभिन्न रचनाकारों के 23 निबंध संकलित हैं।
संग्रह के निबंधों में पंचपरगनिया भाषा, साहित्य, संस्कृति और समाज के साथ-साथ झारखण्ड से संबंधित विविध विषयों को स्थान दिया गया है। इस कारण पुस्तक पंचपरगनिया भाषा-साहित्य के विभिन्न पक्षों को एक साथ समझने के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करती है।
विषय-सूची में ‘पंचपरगनिया भाषा केर उत्पत्ति आर विकास’, ‘पंचपरगनिया संस्कृति’, ‘पंचपरगनिया काव्य जातरा : एकटा रूप-रेखा’ तथा ‘झारखण्ड आन्दोलन’ जैसे विषयों के साथ अनेक अन्य निबंध शामिल हैं।
संग्रह में अलग-अलग रचनाकारों के लेख होने के कारण पंचपरगनिया भाषा-साहित्य, क्षेत्रीय संस्कृति, सामाजिक जीवन और झारखण्ड से जुड़े विषयों पर विविध दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं।
उपलब्ध प्रति पुस्तक का प्रथम संस्करण 16 दिसंबर 2011 का है।

पंचपरगनिया साँसकिरतिक आर साहितिक निबंध
पुस्तक परिचय देखें
‘पंचपरगनिया साँसकिरतिक आर साहितिक निबंध’ पंचपरगनिया संस्कृति, भाषा एवं साहित्य से संबंधित निबंधों का संग्रह है। इसके लेखक दीनबन्धु महतो एवं पुष्पा कुमारी हैं।
पुस्तक की विषय-सूची में कुल 26 निबंध सम्मिलित हैं। इनमें पंचपरगना क्षेत्र की संस्कृति, पर्व-त्योहार, लोकजीवन, गीत-संगीत, नाच-गान और भक्ति परंपरा से संबंधित विषयों को स्थान दिया गया है।
पुस्तक में पंचपरगनिया भाषा की विशेषताओं तथा पंचपरगनिया साहित्य की विभिन्न विधाओं पर भी विचार किया गया है। इसमें पद्य साहित्य, गद्य साहित्य, नाटकीय परंपरा और निबंध रचना की परंपरा एवं विकास से संबंधित निबंध सम्मिलित हैं।
इस प्रकार यह पुस्तक पंचपरगनिया की सांस्कृतिक परंपराओं के साथ-साथ भाषा और साहित्य के विभिन्न पक्षों को समझने के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री प्रस्तुत करती है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2017 तथा द्वितीय संस्करण 2020 में प्रकाशित हुआ। प्रकाशक झारखण्ड झरोखा, राँची है और इसका ISBN 978-93-85595-74-5 है।
गद्य

नुपूर
पुस्तक परिचय देखें
‘नुपूर’ स्व. ज्योतिलाल महादानी की आरंभिक गद्य रचनाओं का संग्रह है। उनकी ये रचनाएँ राँची से प्रकाशित ‘आदिवासी पत्रिका’ में प्रकाशित होती रही थीं।
पुस्तक के ‘आपन कथा’ में डॉ. अम्बिका स्वाँसी ने स्व. ज्योतिलाल महादानी को पंचपरगनिया भाषा के पहले गद्यकार के रूप में मान्य बताया है। इस कारण उनकी रचनाओं का पंचपरगनिया गद्य-साहित्य के इतिहास में विशेष महत्त्व है।
महादानी जी की रचनाएँ अलग-अलग स्थानों पर बिखरी हुई थीं। पंचपरगनिया भाषा के अध्ययन के क्रम में यहाँ के बुद्धिजीवी वर्ग ने मिलकर ‘आदिवासी पत्रिका’ में प्रकाशित उनकी उपलब्ध रचनाओं को एकत्र किया और उनकी पांडुलिपि तैयार कर उसका नाम ‘नुपूर’ रखा।
बाद में यह पांडुलिपि डॉ. अम्बिका स्वाँसी तक पहुँची। पंचपरगनिया पाठकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इन रचनाओं का हिंदी से पंचपरगनिया में अनुवाद किया। अनुवाद करते समय मूल रचनाओं के भाव और विचार को यथासंभव सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया।
इस दृष्टि से ‘नुपूर’ पंचपरगनिया गद्य-साहित्य के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण कृति है। इसमें सुरक्षित रचनाएँ पंचपरगनिया गद्य के आरंभिक स्वरूप और उसकी साहित्यिक विकास-यात्रा को समझने के लिए विशेष महत्त्व रखती हैं।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2015 में झारखण्ड झरोखा, राँची से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-93-85595-34-9 है।

गइदेक भिनु-भिनु डाइर
पुस्तक परिचय देखें
‘गइदेक भिनु-भिनु डाइर’ पंचपरगनिया गद्य रचनाओं का संग्रह है, जिसका संकलन-संपादन प्रो. दीनबन्धु महतो ने किया है।
पुस्तक की विषय-सूची में कुल 20 रचनाएँ संकलित हैं। इनमें राज किशोर सिंह, दीनबन्धु महतो, परमानन्द महतो, त्रिलोचन दास, दुलाल महतो, सुभाष चन्द्र महतो और कृष्णा लोहरा सहित विभिन्न रचनाकारों की रचनाएँ सम्मिलित हैं।
संग्रह में पंचपरगनिया भाषा-साहित्य, कथा तथा विविध सामाजिक और साहित्यिक विषयों से संबंधित गद्य रचनाओं को स्थान दिया गया है। इस प्रकार यह पुस्तक पंचपरगनिया गद्य साहित्य की विविधता को एक स्थान पर प्रस्तुत करती है।
पुस्तक के ‘आमुख’ में पंचपरगनिया गद्य-पद्य साहित्य की परंपरा का उल्लेख करते हुए उपलब्ध रचनाओं को पुस्तकाकार रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2012 में झारखण्ड झरोखा, राँची से प्रकाशित हुआ। इसका ISBN 978-93-81720-17-2 है।
व्याकरण

आदर्श पंचपरगनिया व्याकरण
पुस्तक परिचय देखें
‘आदर्श पंचपरगनिया व्याकरण’ डॉ. करम चन्द्र अहीर द्वारा लिखित पंचपरगनिया भाषा की व्याकरण संबंधी पुस्तक है। पुस्तक को विशेष रूप से प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
पुस्तक की विषय-सूची में व्याकरण के आधारभूत एवं महत्त्वपूर्ण पक्षों को विभिन्न पाठों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें वर्ण, बलाघात, संगम, अनुतान, शब्द, सार्थक शब्द के भेद, संज्ञा, सर्वनाम, वचन, लिंग, पुरुष, कारक, विशेषण और क्रिया जैसे विषय सम्मिलित हैं।
इसके अतिरिक्त पुस्तक में काल, वाक्य, अव्यय, विपरीतार्थक शब्द, शब्द-रचना, शब्द और अर्थ के संबंध, अलंकार आदि विषयों को भी स्थान दिया गया है। पुस्तक में पंचपरगनिया कहावत तथा रचना-खंड के अंतर्गत पत्र-लेखन और निबंध के नमूने भी दिए गए हैं।
पुस्तक के लेखक की ओर से दिए गए विवरण के अनुसार इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पंचपरगनिया व्याकरण की जानकारी उपलब्ध कराना तथा प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर पर इसके अध्ययन में सहायता प्रदान करना है।
उपलब्ध प्रति पुस्तक का द्वितीय संस्करण, जनवरी 2012 है। इसका प्रकाशन पंचपरगनिया भाषा विकास केन्द्रीय समिति, बुण्डू, राँची (झारखण्ड) से संबंधित है।
गीत

झूमर संगीत
पुस्तक परिचय देखें
‘झूमर संगीत’ पंचपरगनिया गीत की पुस्तक है। इसके मूल कवि बिपिन बिहारी मुखी हैं तथा इसका पंचपरगनिया अनुवाद दीनबन्धु महतो ने किया है।
पुस्तक के शीर्षक पृष्ठ पर इसे ‘झूमर संगीत (पंचपरगनिया गीत)’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार यह कृति पंचपरगनिया गीत-साहित्य से संबंधित है।
पुस्तक का प्रथम संस्करण 2014 तथा द्वितीय संस्करण 2017 में प्रकाशित हुआ। इसका प्रकाशन झारखण्ड झरोखा, राँची द्वारा किया गया है।
पुस्तक का ISBN 978-93-81720-93-6 है तथा उपलब्ध प्रकाशन विवरण के अनुसार इसका सर्वाधिकार अनुवादक के पास है।
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