परिचय
Karma Dharma Lok katha: पंचपरगनिया लोक साहित्य में ‘करमा-धरमा’ एक महत्वपूर्ण लोककथा है। इस कथा में करम पर्व, करम राजा की पूजा, करमा और धरमा के जीवन, कर्मफल, सुख-दुःख, लोकविश्वास तथा पारंपरिक धार्मिक आस्था का विस्तृत वर्णन मिलता है। कथा का आरंभ स्वर्ग की परियों और करम पूजा के प्रसंग से होता है तथा आगे करमा और धरमा के जीवन से जुड़ते हुए यह बताती है कि करम राजा के सम्मान और पूजा का लोकजीवन में कितना महत्वपूर्ण स्थान है।
कथा में करमा द्वारा करम राजा का अपमान करने के बाद उसके जीवन में आने वाली विपत्तियों तथा पुनः करम राजा की शरण में जाकर क्षमा माँगने की घटनाएँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। सात समुद्र पार करम राजा की खोज में जाते समय करमा को अनेक व्यक्ति, पशु-पक्षी और प्रतीकात्मक परिस्थितियाँ मिलती हैं, जिनके दुःखों का कारण भी करम राजा के माध्यम से स्पष्ट होता है। अंततः करमा करम पूजा की विधि अपनाकर अपने जीवन में पुनः सुख, समृद्धि और संपन्नता प्राप्त करता है।
यह लोककथा पंचपरगनिया भाषा-साहित्य से संबंधित JSSC, JTET, JPSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी है। परीक्षा की दृष्टि से कथा के पात्र, करम पूजा की तिथि, करमा की यात्रा, करम राजा द्वारा बताए गए कारण और समाधान तथा कथा के प्रमुख घटनाक्रम को ध्यानपूर्वक पढ़ना आवश्यक है।
करमा-धरमा लोककथा का विस्तृत कथासार
बहुत पुराने समय की बात है। भादो महीने की एकादशी के दिन स्वर्गलोक में करम पूजा हो रही थी। स्वर्ग की परियाँ उपवास कर करम देव की पूजा के लिए पृथ्वी लोक से फूल लेने आई थीं। एक राजा के सुंदर फूलों वाले बागान में पहुँचकर वे फूल तोड़ने लगीं। वहाँ नियुक्त पहरेदार परियों और उनके सुंदर रथ को देखकर मोहित हो गया और छिपते-छिपते उसने रथ को छू दिया। रथ अपवित्र हो जाने के कारण उड़ना बंद हो गया।
परियाँ राजा के पास पहुँचीं और पूरी घटना बताई। उन्होंने कहा कि यदि कोई उपवास कर रहा व्यक्ति स्नान करके रथ को छू दे, तो रथ फिर से उड़ सकता है। राजा ने पूरे गाँव में ढोल पिटवाकर ऐसे व्यक्ति की खोज करवाई। उसी रात दो सास-बहू के बीच झगड़ा हुआ था, इसलिए दोनों बिना खाए-पिए सो गई थीं और अगले दिन भी उन्होंने भोजन नहीं किया था। उन्होंने कहा कि यदि उनके छूने से रथ चल सकता है, तो वे स्नान करके उसे छू देंगी। परियों की अनुमति से दोनों ने रथ को छुआ और रथ फिर उड़ गया।
इस प्रसंग के बाद राजा ने परियों से करम पूजा का महत्त्व और विधि पूछी। परियों ने बताया कि भादो महीने की एकादशी के दिन करम वृक्ष की डाल काटकर आँगन में गाड़नी चाहिए, उपवास करके उसकी पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से घर में अन्न-धन, लक्ष्मी और दूध-भात की समृद्धि बनी रहती है। राजा ने उसी दिन से करम पूजा आरंभ कर दी। बाद में उसके दो पुत्र हुए—करमा और धरमा।
समय बीतने पर करमा धन कमाने के लिए परदेश चला गया। वहाँ उसने बहुत धन कमाया और एक दिन अपनी कमाई लेकर घर लौटने लगा। गाँव के पास पहुँचते-पहुँचते वह भूख और प्यास से थक गया तथा एक पेड़ के नीचे बैठ गया। उसने गाँव के एक व्यक्ति से संदेश भेजा कि धरमा बैलगाड़ी लेकर उसे लेने आए।
संयोग से वह दिन भी भादो महीने की करम एकादशी का था। धरमा अपने आँगन में करम डाल गाड़कर पूजा, नाच और अनुष्ठान में मग्न था। इसी कारण वह करमा को लेने जाना भूल गया। काफी देर तक प्रतीक्षा करने के बाद करमा क्रोधित होकर घर पहुँचा। उसने गुस्से में करम राजा की गाड़ी हुई डाल को डंडे से पीटा और उसे उठाकर एक गंदी नाली में फेंक दिया। करम राजा अपमानित होकर सात समुद्र पार चले गए। उसी दिन से करमा का भाग्य विपरीत हो गया और उसकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
करमा और उसकी पत्नी धीरे-धीरे अत्यंत गरीबी और कष्ट में पड़ गए। एक दिन दोनों धरमा के खेत में मजदूरी करने गए। करमा मेड़ बनाने लगा और उसकी पत्नी धान रोपने लगी, लेकिन धरमा ने उन्हें न नाश्ता दिया और न भोजन। दुखी होकर करमा ने पत्नी से कहा कि वह जितना धान रोपी है, उसे उखाड़ ले और वह स्वयं बनाई हुई मेड़ तोड़ देगा। किंतु करम राजा की कृपा से धरमा की मेड़ पुनः बन जाती और पत्नी द्वारा उखाड़ा गया धान फिर से रोपा हुआ दिखाई देता। इससे करमा और भी चकित और दुखी हो गया।
अंततः करमा ने धरमा से अपनी दशा कही। धरमा ने स्पष्ट बताया कि उसका करम बाम हो गया है और उसे करम राजा को वापस लाना चाहिए। अगले दिन करमा अकेला सात समुद्र पार करम राजा की खोज में निकल पड़ा। उसकी पत्नी ने कपड़े में बाँधकर पाटरा कुँढ़ा दिया और कहा कि रास्ते में भूख लगे तो उसे खाकर पानी पी लेना।
रास्ते में करमा को अनेक विचित्र घटनाएँ मिलीं। एक नदी का पानी पीने गया तो पानी सड़ा हुआ दिखाई दिया। आगे एक पेड़ पर सुंदर फल दिखे, लेकिन खाने पर वे भी सड़े निकले। फिर एक विशाल साँप मिला जो मानो आकाश और पाताल के बीच फैला था; करमा “जहाइर करम राजा” कहते हुए उस संकट से निकल गया। थोड़ी दूर आगे इसी प्रकार एक विशाल बाघ मिला, उससे भी वह करम राजा का स्मरण करते हुए बच निकला।
आगे उसे काँटों का बोझ ढोता एक व्यक्ति मिला। उसने करमा से कहा कि यदि वह करम राजा के पास जा रहा है तो उसके दुःख का कारण भी पूछे, क्योंकि उसके सिर से काँटों का बोझ कभी उतरता नहीं। करमा ने उसका संदेश ले लिया। इसके बाद उसे एक गाँव में चिउड़ा कूटते गँवार और गँवारिन मिले। उन्होंने भोजन देने से पहले अपना दुःख बताया—उनके पीछे पीढ़ा हमेशा लटका रहता था और हटता नहीं था। उन्होंने भी करम राजा से कारण पूछने को कहा।
इसके बाद करमा की भेंट एक ग्वाले से हुई। उसकी गाय और बछड़ा एक-दूसरे के पास नहीं आते थे; गाय एक ओर भागती और बछड़ा दूसरी ओर। ग्वाले ने भी करमा से अपना दुःख करम राजा तक पहुँचाने का अनुरोध किया। आगे सात समुद्र के किनारे पहुँचकर करमा घबरा गया। वहाँ उसे हंस और हंसिन मिले। उन्होंने उसे अपनी पीठ पर बैठाकर सात समुद्र पार कराया, बदले में अपना दुःख करम राजा से पूछने को कहा कि उन्हें न जल में सुख मिलता है और न थल पर।
सात समुद्र पार करमा को अंततः करम राजा दिखाई दिए। करम राजा उसे देखकर पहले दूर हटने लगे, क्योंकि करमा ने उनका अपमान किया था। करमा ने उन्हें पुकारकर कहा कि वह उनकी शरण में आया है। वह उनके चरणों में गिर पड़ा, अपनी भूल स्वीकार की और क्षमा माँगी। उसने प्रतिज्ञा की कि आगे से वह करम राजा की पूजा और सम्मान करेगा। करम राजा ने उसे क्षमा कर दिया और कहा कि भादो महीने की एकादशी को करम डाल काटकर आँगन में गाड़कर पूजा करे; इससे उसके सभी दुःख दूर हो जाएँगे और घर फिर से अन्न-धन, लक्ष्मी और दूध-भात से भर जाएगा।
करम राजा ने पूछा कि वह उनके लिए क्या संदेश या भोजन लाया है। करमा को तब पत्नी द्वारा दिया गया पाटरा कुँढ़ा याद आया। वह देने में संकोच करने लगा, लेकिन करम राजा ने वही माँग लिया। उनकी कृपा से साधारण पाटरा कुँढ़ा रसगुल्ला बन गया और दोनों ने उसे बाँटकर खाया।
विदा लेते समय करमा ने रास्ते में मिले सभी व्यक्तियों और जीवों की समस्याएँ करम राजा को बताईं। करम राजा ने एक-एक कर सबका कारण और समाधान बताया। हंस-हंसिन ने एक रानी का सोने का हार चुराकर खा लिया था, इसलिए उन्हें न जल में सुख था न थल में; हार लौटाने पर उनका दुःख दूर होगा। ग्वाले ने करम राजा की पूजा के लिए माँगा गया दूध देने से इंकार किया था, इसलिए उसकी गाय-बछड़ा अलग-अलग भागते थे; पूजा के लिए दूध अर्पित करने पर समस्या दूर होगी। गँवार और गँवारिन बड़ों का सम्मान नहीं करते थे, इसलिए उनका पीढ़ा नहीं छूटता था; गुरुजनों का आदर करने से उनका दुःख मिटेगा। काँटा ढोने वाला व्यक्ति रास्ते में काँटे बिखेरता था; रास्ता साफ करने पर उसका बोझ हटेगा। करम राजा ने यह भी बताया कि जो साँप और बाघ करमा को रास्ते में मिले थे, वे वास्तव में उसकी अपनी संपत्ति—टाका केर हाँड़ा और आरना काड़ा—थे, जिन्हें करम बाम होने के कारण वह पहचान नहीं पाया था।
वापसी में करमा ने हंस-हंसिन, ग्वाले, गँवार-गँवारिन और काँटा ढोने वाले व्यक्ति को उनके दुःख का कारण और समाधान बताया। रास्ते में उसने अपने आरना काड़ा और टाका केर हाँड़ा को भी पहचान लिया और उन्हें साथ लेकर घर पहुँचा।
भादो महीने की एकादशी आने पर करमा ने दो करम डाल काटकर अपने आँगन में गाड़ीं और करम राजा की विधिपूर्वक पूजा की। करम राजा की कृपा से उसके घर फिर से अन्न-धन, लक्ष्मी और दूध-भात की भरपूर समृद्धि आ गई। करमा और उसकी पत्नी के सारे दुःख समाप्त हो गए। इस प्रकार कथा करम पूजा की महिमा, कर्मफल, विनम्रता, प्रायश्चित और लोकआस्था को स्थापित करती है।
प्रमुख पात्र और मुख्य कथ्य
प्रमुख पात्र
- करमा — कथा का केंद्रीय पात्र। धन कमाने के लिए परदेश जाता है, करम राजा का अपमान करता है, उसके बाद विपत्तियों से घिरता है और अंततः करम राजा की शरण में जाकर क्षमा माँगता है।
- धरमा — करमा का भाई। करम पूजा में आस्थावान है और करमा को बताता है कि उसका करम बाम हो गया है तथा उसे करम राजा को वापस लाना चाहिए।
- करम राजा — कथा के केंद्रीय लोकदेव। उनके सम्मान, पूजा, कृपा और अप्रसन्नता से कथा का पूरा घटनाक्रम संचालित होता है।
- राजा — कथा के प्रारंभिक भाग का पात्र, जो परियों से करम पूजा की विधि और महात्म्य जानकर पूजा आरंभ करता है। बाद में उसके दो पुत्र करमा और धरमा होते हैं।
- स्वर्ग की परियाँ — करम पूजा के लिए पृथ्वी पर फूल लेने आती हैं और राजा को करम पूजा की विधि बताती हैं।
- दो सास-बहू — झगड़े के कारण बिना खाए-पिए रहती हैं। स्नान करके उनके रथ को छूने से परियों का रथ फिर उड़ने लगता है।
- करमा की पत्नी — करमा के दुःख में साथ रहती है और सात समुद्र पार जाने से पहले उसे कपड़े में बाँधकर पाटरा कुँढ़ा देती है।
- काँटा ढोने वाला व्यक्ति — अपने सिर से काँटों का बोझ न उतरने की समस्या करमा के माध्यम से करम राजा तक पहुँचाता है।
- गवार और गवारिन — चिउड़ा कूटते हुए मिलते हैं। उनके पीछे लटका पीढ़ा नहीं हटता, जिसका कारण बाद में करम राजा बताते हैं।
- ग्वाला — उसकी गाय और बछड़ा एक-दूसरे के पास नहीं आते। वह करमा से अपने दुःख का कारण करम राजा से पूछने को कहता है।
- हंस और हंसिन — करमा को सात समुद्र पार कराते हैं और अपने दुःख का कारण पूछने का अनुरोध करते हैं।
- साँप और बाघ — यात्रा में करमा को संकट रूप में दिखाई देते हैं, पर बाद में करम राजा बताते हैं कि वे वास्तव में उसकी अपनी संपत्ति से जुड़े रूप थे, जिन्हें करम बाम होने के कारण वह पहचान नहीं पाया था।
मुख्य कथ्य
‘करमा-धरमा केर काथा’ का मुख्य कथ्य करम पूजा की महिमा, कर्मफल, देव-आस्था, प्रायश्चित और पुनः प्राप्त समृद्धि है। कथा में यह स्पष्ट किया गया है कि करम राजा के अपमान के बाद करमा का भाग्य विपरीत हो जाता है, जबकि धरमा करम पूजा और करम राजा की कृपा से सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।
कथा का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि करमा अपने दुःख से मुक्ति पाने के लिए केवल पश्चाताप ही नहीं करता, बल्कि कठिन यात्रा करके करम राजा की शरण में पहुँचता है। रास्ते में उसे अनेक व्यक्ति और जीव मिलते हैं, जिनके दुःख उनके पूर्व व्यवहार या कर्मों से जुड़े होते हैं। करम राजा एक-एक समस्या का कारण और समाधान बताते हैं। इस प्रकार कथा में कर्म और उसके फल की धारणा बार-बार सामने आती है।
कथा में बड़ों का सम्मान, दान, सेवा, रास्ता साफ रखना, चोरी से बचना, देवपूजा का सम्मान करना और गलती स्वीकार कर सुधार करना जैसे लोकनैतिक मूल्य भी जुड़े हैं। अंततः करमा करम पूजा की विधि अपनाता है और उसके घर फिर से अन्न-धन, लक्ष्मी तथा दूध-भात की समृद्धि लौट आती है।
कथा का प्रमुख संदेश
इस लोककथा से यह संदेश मिलता है कि अहंकार, अपमान और गलत कर्म मनुष्य को दुःख की ओर ले जा सकते हैं, जबकि पश्चाताप, विनम्रता, लोकपरंपरा के सम्मान और सही आचरण से जीवन में सुधार संभव है। कथा करम पूजा को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक आचरण, कर्मफल और सामुदायिक लोकविश्वास से भी जोड़ती है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- लोककथा का नाम — करमा-धरमा केर काथा।
- कथा का संबंध करम पूजा और करम राजा की महिमा से है।
- कथा का आरंभ स्वर्गलोक में होने वाली करम पूजा के प्रसंग से होता है।
- स्वर्ग की परियाँ करम देव की पूजा के लिए पृथ्वी लोक में फूल लेने आती हैं।
- उस दिन भादर इंजतिआ पइख की एकादशी थी।
- परियाँ एक राजा के फूलों के बागान में फूल तोड़ने आती हैं।
- बागान में विभिन्न प्रकार के फूल खिले रहते हैं।
- राजा ने बागान की रखवाली के लिए एक पहरेदार रखा था।
- पहरेदार परियों और उनके रथ को देखकर मोहित हो जाता है।
- पहरेदार के स्पर्श से परियों का रथ अपवित्र हो जाता है।
- रथ अपवित्र होने के कारण उड़ना बंद कर देता है।
- परियाँ राजा से सहायता माँगती हैं।
- परियों के अनुसार कोई उपवास करने वाला व्यक्ति स्नान करके रथ को छुए तो वह फिर उड़ सकता है।
- राजा पूरे गाँव में ढोल पिटवाकर ऐसे व्यक्ति की खोज कराता है।
- दो सास-बहू रात के झगड़े के कारण बिना खाए-पिए रहती हैं।
- सास-बहू स्नान करके परियों के रथ को छूती हैं।
- उनके छूते ही रथ फिर उड़ने लगता है।
- राजा परियों से करम पूजा का महत्त्व और विधि पूछता है।
- परियाँ बताती हैं कि भादो की एकादशी को करम वृक्ष की डाल आँगन में गाड़कर उपवासपूर्वक पूजा करनी चाहिए।
- करम पूजा से अन्न-धन, लक्ष्मी और दूध-भात की समृद्धि प्राप्त होने की मान्यता कथा में व्यक्त है।
- राजा उसी दिन से करम पूजा करने लगता है।
- राजा के दो पुत्र होते हैं — करमा और धरमा।
- करमा धन कमाने के लिए परदेश जाता है।
- परदेश में करमा बहुत धन कमाता है।
- घर लौटते समय गाँव के पास पहुँचकर करमा भूख और प्यास से थक जाता है।
- करमा धरमा को गरु-गाड़ी लेकर उसे लेने आने का संदेश भेजता है।
- उस दिन भी करम एकादशी थी।
- धरमा अपने आँगन में करम डाल गाड़कर पूजा और नाच में मग्न रहता है।
- धरमा करमा को लेने जाना भूल जाता है।
- करमा क्रोधित होकर घर पहुँचता है।
- करमा डंडे से करम राजा की गाड़ी हुई डाल को पीटता है।
- करमा करम डाल को गंदी नाली में फेंक देता है।
- करम राजा नाराज होकर सात समुद्र पार चले जाते हैं।
- उसी समय से करमा का करम बाम हो जाता है।
- करमा की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होने लगती है।
- करमा और उसकी पत्नी धरमा के खेत में मजदूरी करने जाते हैं।
- करमा मेड़ बनाता है और उसकी पत्नी धान रोपती है।
- करमा और उसकी पत्नी को धरमा भोजन नहीं देता।
- करमा अपनी बनाई मेड़ तोड़ने और पत्नी से रोपा धान उखाड़ने को कहता है।
- करम राजा की कृपा से धरमा की मेड़ फिर बन जाती है और उखाड़ा धान फिर रोपा हुआ दिखाई देता है।
- करमा अपनी विपत्ति का कारण समझने के लिए धरमा के पास जाता है।
- धरमा बताता है कि करमा का करम बाम हो गया है और उसे करम राजा को वापस लाना होगा।
- करमा अकेले सात समुद्र पार करम राजा की खोज में निकलता है।
- करमा की पत्नी उसे कपड़े में बाँधकर पाटरा कुँढ़ा देती है।
- रास्ते में करमा एक नदी का पानी पीना चाहता है।
- नदी का पानी उसे सड़ा हुआ दिखाई देता है।
- आगे उसे सुंदर फल वाला एक पेड़ मिलता है।
- फल बाहर से अच्छे दिखते हैं, लेकिन खाने पर सड़े मिलते हैं।
- रास्ते में करमा को एक विशाल साँप मिलता है।
- इसके बाद उसे एक विशाल बाघ मिलता है।
- दोनों संकटों से करमा “जहाइर करम राजा” कहते हुए पार हो जाता है।
- आगे करमा की भेंट काँटों का बोझ ढोने वाले व्यक्ति से होती है।
- काँटा ढोने वाला व्यक्ति करम राजा से अपने दुःख का कारण पूछने का संदेश देता है।
- आगे करमा एक गाँव में गवार और गवारिन को चिउड़ा कूटते देखता है।
- गवार-गवारिन के पीछे पीढ़ा लटका रहता है और हटता नहीं।
- वे भी करमा से अपने दुःख का कारण करम राजा से पूछने को कहते हैं।
- आगे करमा की भेंट एक ग्वाले से होती है।
- ग्वाले की गाय और बछड़ा एक-दूसरे के पास नहीं आते।
- ग्वाला भी करमा से अपने दुःख का कारण पूछने का अनुरोध करता है।
- सात समुद्र के किनारे करमा की भेंट हंस और हंसिन से होती है।
- हंस-हंसिन को न जल में सुख मिलता है और न थल में।
- हंस-हंसिन करमा को अपनी पीठ पर बैठाकर सात समुद्र पार कराते हैं।
- बदले में वे करम राजा से अपने दुःख का कारण पूछने को कहते हैं।
- सात समुद्र पार करमा की भेंट अंततः करम राजा से होती है।
- करम राजा करमा को पहचान लेते हैं।
- करमा उनके सामने शरणागत होकर अपनी गलती स्वीकार करता है।
- करमा करम राजा से अपने अपमान के लिए क्षमा माँगता है।
- करमा आगे से करम राजा का सम्मान और पूजा करने की प्रतिज्ञा करता है।
- करम राजा करमा को क्षमा कर देते हैं।
- करम राजा उसे भादो की एकादशी को करम डाल काटकर आँगन में गाड़कर पूजा करने का निर्देश देते हैं।
- करम राजा कहते हैं कि ऐसा करने पर उसके दुःख मिट जाएँगे और घर में अन्न-धन तथा लक्ष्मी की समृद्धि लौट आएगी।
- करम राजा करमा से पूछते हैं कि वह उनके लिए क्या खाने का संदेश लाया है।
- करमा को पत्नी द्वारा दिया गया पाटरा कुँढ़ा याद आता है।
- करम राजा की कृपा से पाटरा कुँढ़ा रसगुल्ला बन जाता है।
- करमा और करम राजा उसे बाँटकर खाते हैं।
- करमा लौटने से पहले रास्ते में मिले सभी व्यक्तियों और जीवों की समस्याएँ करम राजा को बताता है।
- हंस-हंसिन ने एक रानी का सोने का हार चुराकर खा लिया था।
- इसी कारण उन्हें न जल में सुख मिलता था और न थल में।
- हार वापस करने पर उनका दुःख दूर होने का उपाय बताया जाता है।
- ग्वाले ने करम राजा की पूजा के लिए माँगा गया दूध देने से इंकार किया था।
- इसी कारण उसकी गाय और बछड़ा अलग-अलग भागते थे।
- करम राजा की पूजा में दूध अर्पित करने पर समस्या दूर होने की बात कही गई।
- गँवार और गँवारिन बड़ों को देखकर भी आसन नहीं छोड़ते थे।
- इसी कारण उनके पीछे पीढ़ा लटका रहता था।
- गुरुजनों का सम्मान करने पर उनका दुःख दूर होने का उपाय बताया गया।
- काँटा ढोने वाला व्यक्ति रास्ते में काँटे बिखेरता था।
- रास्ता साफ करने पर उसके काँटों का बोझ उतरने की बात कही गई।
- करम राजा बताते हैं कि रास्ते में मिला विशाल साँप और बाघ वास्तव में करमा की अपनी संपत्ति से जुड़े रूप थे।
- करम बाम होने के कारण करमा उन्हें पहचान नहीं पाया था।
- लौटते समय करमा हंस-हंसिन को उनके दुःख का कारण और समाधान बताता है।
- वह गँवार-गँवारिन, ग्वाले और काँटा ढोने वाले व्यक्ति को भी करम राजा द्वारा बताए गए कारण और समाधान बताता है।
- करमा अपने आरना काड़ा को पहचानकर साथ ले आता है।
- करमा अपने टाका केर हाँड़ा को भी पहचानकर घर लाता है।
- भादो की एकादशी आने पर करमा दो करम डाल काटकर लाता है।
- वह दोनों करम डाल अपने आँगन में गाड़ता है।
- करमा विधिपूर्वक करम राजा की पूजा करता है।
- पूजा के बाद उसके घर में पुनः अन्न-धन, लक्ष्मी और दूध-भात की समृद्धि आ जाती है।
- करमा और उसकी पत्नी के सारे दुःख समाप्त हो जाते हैं।
- कथा का मूल भाव — करम पूजा की महिमा, कर्मफल, विनम्रता, प्रायश्चित और लोकआस्था है।
- कथा में बार-बार यह संकेत मिलता है कि गलत कर्म का परिणाम दुःख के रूप में और सुधार का फल सुख के रूप में मिलता है।
- कथा में बड़ों का सम्मान, दान, सेवा, मार्ग की सफाई, चोरी से बचना और देव-पूजा का सम्मान जैसे लोकनैतिक मूल्य भी जुड़े हैं।
प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्देश
- ‘करमा-धरमा’ लोककथा को केवल सार रूप में न पढ़ें; MCQ Quiz देने से पहले पूरी कथा को विस्तार से पढ़ें।
- कथा के मुख्य पात्र, करम पूजा की तिथि, करमा-धरमा का संबंध, करम राजा का अपमान, सात समुद्र पार की यात्रा और वापसी के घटनाक्रम पर विशेष ध्यान दें।
- काँटा ढोने वाले व्यक्ति, गँवार-गँवारिन, ग्वाला, हंस-हंसिन, साँप और बाघ से जुड़े प्रसंगों को क्रम से समझें।
- विभिन्न पात्रों के दुःखों के कारण और करम राजा द्वारा बताए गए समाधान परीक्षा की दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
- पाटरा कुँढ़ा, रसगुल्ला, सोने का हार, टाका केर हाँड़ा, आरना काड़ा और दो करम डाल जैसे विशेष प्रसंगों को ध्यान से पढ़ें।
- Quiz पूरा करने के बाद जिन प्रश्नों में गलती हो, उनसे संबंधित कथा-प्रसंग को दोबारा पढ़ें और फिर Quiz पुनः हल करें।
स्रोत-नोट
यहाँ प्रस्तुत ‘करमा-धरमा केर काथा’ परमानन्द महतो की पुस्तक पंचपरगनिया लोककथा के पाठ के आधार पर तैयार की गई है। पुस्तक का प्रथम संस्करण 2021 में पृथ्वी प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित हुआ है।
एक ही लोककथा के अलग-अलग पुस्तकों अथवा मौखिक परंपराओं में कथानक, पात्र, शब्दावली या घटनाओं में कुछ अंतर मिल सकता है। इसलिए इस article में दिया गया कथासार, परीक्षा-उपयोगी तथ्य और संबंधित MCQ Quiz इसी पुस्तक में उपलब्ध पाठ को आधार मानकर तैयार किया गया है।
करमा-धरमा लोककथा MCQ Quiz
‘करमा-धरमा केर काथा’ को विस्तार से पढ़ने के बाद अब संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से अपनी तैयारी की जाँच करें। Quiz शुरू करने से पहले कथा के पात्र, प्रमुख घटनाएँ, करम पूजा की विधि, करमा की यात्रा तथा करम राजा द्वारा बताए गए कारण और समाधान एक बार पुनः दोहरा लें।
करमा-धरमा लोककथा – MCQ Quiz
Results
#1. करम परब कबे मानल जाएला?
#2. हेंठे देल मइधे करम परब के मानाएला?
#3. करम उपास मुल रूपे के करेला?
#4. करम पुजा माहान ‘‘खिरा’’ का केर परतिक हेके?
#5. जाउआ जागाएक चलन हेंठे देल मइधे कन परबे आहे?
#6. ‘‘इति-इति जाउआ, किआ-किआ जाउआ……..।’’ कन परबेक गित हेके
#7. हेंठे देल मइधे जाउआ उठाएक तेहें कनटाक बेब’हार करल जाएला?
#8. हेंठे देल मइधे कन परबे फुल लहरा काम करल जाएला?
#9. खेते ‘‘डारि गाड़ा’’ कबे करल जाएला?
#10. करमा-धरमा केर काथा कन परबे कहल जाएला?
#11. करमा-धरमा केर काथा मेंहेन के बड़े भाइ हेके?
#12. करमा-धरमा काथा मेंहेन के बेपार करे बाहिर जाएला?
#13. करम परबे कन गाछ केर पुजा करल जाएला?
#14. करम पुजा के कराएला?
#15. करम कए दिनेक चांदे गाड़ल जाएला?
#16. करम परब टा आसल मेंहेन हेके?
#17. करम उपासिआ के का कहल जाएला?
#18. ‘‘बालि उठाएक’’ चलन कन परबे आहे?
#19. बालि काहां जाएके उठाएना?
#20. करम राजा के कन दिन भांसाल जाएला?
#21. करम परबे जाउआक मांए के बनेला?
#22. करम पुजा एकटा हेके?
#23. करमा-धरमा कहनि टाएं खेतिक काम के करेला?
#24. करमा-धरमा कहनि टाएं करम बाम केकर हए रहे?
#25. ‘‘जाहु-जाहु करम राजा, एह’ छएअ मास………।’’इ गित टा कन समइ कर हेके?
#26. करमा-धरमा कहनि टाएं करम राजा के, के उखनाए के सात समुंदर पारे फेंकेला?
#27. करम परबे संजेत कन दिन करल जाएला?
#28. करमा धरमा काथा टाक अनुजाइ सरगपुरी मेंहेन करम पुजा के करत रहे?
#29. करमा धरमा काथा टाक अनुजाइ सरग’ केर परी सउब फुल लरहे हेंठे देल काहाँ आए रहेन?
#30. फुल लरहा काम टा हेंठे देल कन परबे करल जाएला?
#31. करमा धरमा काथा टाक अनुजाइ परी सउब केर रँथ टाके के अप’बितर’ कइर दे रहे?
#32. करमा धरमा काथा टाक अनुजाइ परी गिलाक रँथ टा काहे नि उड़ेला?
#33. करमा धरमा काथा टाक अनुजाइ जखन परी सउब केर रँथ नि उड़ेला तखन उमन केकर पास लालिस करे गेलएं?
#34. ‘‘जदि रउर कर गाँव माहान केउ उपास कइर आहएँ से जदि नाहाए-धवाए के हामरेक रँथ टा छुइ देइ, हलेइ उड़ी।’’ इ कथन टा हेंठे देल केकर हेके?
#35. करमा धरमा काथा टाएं राजा का तेहें ढ’ल पिटुवाए रहे?
#36. करमा धरमा काथा टाएं हेंठे देल केकर-केकर बिचे झागड़ा हए रहे?
#37. करमा धरमा काथा टाएं राजा केर गाँउएक, हेंठे देल के उपासे आहे?
#38. करमा धरमा काथा टाएं केकर छुअल तेहें परी सउब केर रँथ उड़ेला?
#39. करमा धरमा काथा टाएं करम राजाक परतापे राजा केर कएटा छुआ हलएं ?
#40. करमा धरमा काथा टाएं राजाक बेटा गिलाक नाम बाछा?
#41. करमा धरमा काथा टाएं करमा बेपार कइर के कन दिन घुरेला?
#42. करमा धरमा काथा टाएं करमा जन दिन बेपार ले घुरेला उ दिन धरमा आपन आँगनाएं का गाइड़ रहेला?
#43. करमा धरमा काथा टाएं करम राजा के हेंठे देल कन पातर’ टा ठेंगाए पिटेला?
#44. करमा धरमा काथा टाएं हेंठे देल केकर करम बाम हए आहे?
#45. करमा धरमा काथा टाएं करमा आर अकर बहु केकर ताहाँ खेते काम करे जाएनला?
#46. करमा धरमा काथा टाएं कन पातर’ केर आरथिक दासा बगड़ि आहे?
#47. करमा धरमा काथा टाएं धरमा केके भुति नि देला?
#48. करमा धरमा काथा टाएं हेंठे देल मइधे के चासा हेके?
#49. करमा धरमा काथा टाएं धरमा केर र’पल धान आर आइड़, के बगड़ाए जाएला?
#50. ‘‘ए धरमा हामरे दिअ बुढ़ा-बुढ़ि बेजाइं कसट’ भग करे लाइग आही। तर देख न दिने-दिने अन-धन, लखी-लछमी बाइढ़ रइह आह।’’ इ कथन टा हेंठे देल केकर हेके?
#51. करमा धरमा काथा टाएं करम केर बहु चेंथरा लुगाएं का जिनिस पुटली बांइध कहन करम राजा के सात समुंदर खजे लाए पाठाएला?
#52. करमा धरमा काथा टाएं करमा पाटरा कुँढ़ा टा काँहाँ राखेला?
#53. करमा धरमा काथा टाएं करमा जखन नदिक पानी पिए खजेला आर कइर खाए खजेला तखन उगलाएं का देखे पाएला?
#54. करमा धरमा काथा टाएं करमा जखन करम राजा के खजे बाहराएला तखन उके एकटा बड़े साँप छेंकेला, उ साँप टा करमा केर के रहेला?
#55. करमा धरमा काथा टाएं करम राजा के खजत के करमा के जन बाघ टा भेंटाए रहे सेटा करमा केर के रहे?
#56. करमा धरमा काथा टाएं करमा के चिउरा हेंठे देल के खिआएला?
#57. ‘‘तके हामरे सात समुंदर पार करब, तबे करम राजा के हामरे केर’ दुख सुनाए दे हइ आर पुइछ दे हइ जे हामरे केर कन कारने ना जले सुख आहे आर ना थले।’’ इ कथन टा हेंठे देल केकर हेके?
#58. करमा धरमा काथा टाएं करम राजा केर किरपाएं ‘‘पाटरा कुँढ़ा’’ टा का बनेला?
#59. करमा धरमा काथा टाएं कांटा भारिआ टाके, कन कार’ने द’स लाइग आहे?
#60. करमा धरमा काथा टाएं हाँस-हाँसिन के कन कार’ने द’स लाइग आहे?
#61. ‘‘ए करम राजा! रउरे ना पाराउ, मएं रउर केर सरन माहान आए आहं।’’ इ कथन टा हेंठे देल केकर हेके?
#62. करमा धरमा काथा टाएं हेंठे देल के गिला च’राल धन खाए आहेन?
#63. करमा धरमा काथा टाएं गवाला , हेंठे देल कन द’स टा कइर आहे?
#64. करमा धरमा काथा टाएं गवार-गवारिन हेंठे देल कन द’स टा कइर रहएँ?
#65. ‘‘जे साँप आर बाघ सरग आर पाताल हा फाइड़ रहएँ सेइ गिला त’ तर टाकाक हाँड़ा आर आरना काड़ा हेकएँ। करमबाम केर तेहें तएँ चिन्हे नि पारले।’’ इ कथन टा हेंठे देल केकर हेके?
#66. ‘‘तहरे एकटा रानी केर सनाक हाइर चराए कहन खाए आहा सेइ तेहें तहरेक एसन गति हए आहे। तहरे उलगी कहन सनाक हाइर टाके आपन पेट लेक बाहरावा आर रानी के घुराए देवा, हलेइ दुख मेटी।’’ इ कथन टा हेंठे देल केके कहल जाए आहे?
Quiz के बाद क्या करें?
Quiz पूरा करने के बाद अपने Score तथा सही-गलत उत्तरों की जाँच करें। जिन प्रश्नों में गलती हुई हो, उनसे संबंधित लोककथा या प्रसंग को दोबारा पढ़ें और फिर Quiz पुनः हल करें।
करमा-धरमा लोककथा – FAQ
‘करमा-धरमा केर काथा’ और संबंधित MCQ Quiz से जुड़े सामान्य प्रश्न।
‘करमा-धरमा’ लोककथा का मुख्य विषय क्या है?
इस लोककथा का मुख्य विषय करम पूजा की महिमा, कर्मफल, लोकआस्था, प्रायश्चित, करम राजा के प्रति सम्मान तथा जीवन में सुख-दुःख के कारणों से जुड़ा है।
करमा और धरमा कौन थे?
करमा और धरमा राजा के दो पुत्र थे। धरमा करम पूजा में आस्थावान था, जबकि करमा द्वारा करम राजा का अपमान करने के बाद उसके जीवन में अनेक विपत्तियाँ आती हैं।
करमा का करम बाम क्यों हुआ?
करमा ने क्रोध में आकर करम राजा की गाड़ी हुई डाल को पीटा और गंदी नाली में फेंक दिया। करम राजा के इस अपमान के बाद उसका करम बाम हो गया और उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी।
करमा करम राजा की खोज में कहाँ गया?
करमा अपने दुःख से मुक्ति पाने के लिए करम राजा की खोज में सात समुद्र पार गया। इस यात्रा में उसे अनेक व्यक्ति, पशु-पक्षी और कठिन परिस्थितियाँ मिलीं।
करम राजा ने करमा को क्या उपाय बताया?
करम राजा ने करमा को भादो महीने की एकादशी के दिन करम डाल काटकर आँगन में गाड़ने और विधिपूर्वक पूजा-सेवा करने का निर्देश दिया। ऐसा करने पर उसके दुःख दूर होने और घर में समृद्धि लौटने की बात कही गई।
‘करमा-धरमा’ लोककथा किस पुस्तक के पाठ पर आधारित है?
यहाँ प्रस्तुत ‘करमा-धरमा केर काथा’ परमानन्द महतो की पुस्तक पंचपरगनिया लोककथा के पाठ पर आधारित है। इस article और संबंधित MCQ Quiz में इसी पाठ को आधार माना गया है।
क्या यह लोककथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है?
हाँ, पंचपरगनिया भाषा-साहित्य से संबंधित JSSC, JTET, JPSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में इसके पात्र, घटनाक्रम, करम पूजा की विधि, यात्रा-प्रसंग और कारण-समाधान उपयोगी हो सकते हैं।
MCQ Quiz देने से पहले क्या करना चाहिए?
Quiz देने से पहले पूरी लोककथा को विस्तार से पढ़ें और मुख्य पात्र, घटनाक्रम, करमा की यात्रा, करम राजा द्वारा बताए गए कारण-समाधान तथा करम पूजा से संबंधित तथ्यों को एक बार दोहरा लें।
निष्कर्ष
‘करमा-धरमा केर काथा’ पंचपरगनिया लोककथा परंपरा की एक महत्वपूर्ण कथा है, जिसमें करम पूजा, लोकआस्था, कर्मफल, प्रायश्चित, पारिवारिक संबंध और सामाजिक आचरण का समन्वित रूप दिखाई देता है। करमा के जीवन में आने वाली विपत्तियाँ, करम राजा की खोज के लिए उसकी सात समुद्र पार की यात्रा तथा विभिन्न पात्रों के दुःखों के कारण और समाधान कथा को विशेष रूप से रोचक और शिक्षाप्रद बनाते हैं।
कथा यह संदेश देती है कि अहंकार और गलत आचरण का परिणाम दुःख हो सकता है, जबकि विनम्रता, पश्चाताप, सही व्यवहार और परंपरागत लोकविश्वास के सम्मान से जीवन में सुधार संभव है। करमा का अंततः करम राजा की शरण में जाना और विधिपूर्वक पूजा करने के बाद पुनः सुख-समृद्धि प्राप्त करना इसी भाव को स्पष्ट करता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से इस लोककथा के पात्र, तिथि, घटनाक्रम, यात्रा-प्रसंग, प्रतीकात्मक पात्र, कारण-समाधान और करम पूजा से जुड़े तथ्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए कथा को विस्तार से पढ़ने के बाद संबंधित MCQ Quiz का अभ्यास करना अधिक उपयोगी रहेगा।



