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पंचपरगनिया भाषा का जन्म / उद्भव : उत्पत्ति, विकास और भाषिक आधार

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प्रस्तावना

पंचपरगनिया भाषा का जन्म / उद्भव : भासा आर समाज केर संबंध बहुत घनिस्ट’ आर अकाट रहेला एआनि जेटाके अलग नि करल जाए पाराए। कनइ भि भासा केर आसतित किबल धउनि, सबद’ आर बेआकरन तके सीमित नि हएला, बलकि उ आपन समाज केर संसकिरति, इतिहास, परंपरा आर सामुहिक चेतना केर बाहक’ हएला। एहे कारने कनइ भि भासा केर उदभव केर अइधन किबल भासा बइगानिक नजइरेइ नाहि, बलकि सामाजिक, सांसकिरतिक आर एइतिहासिक आधारउ करल जाएला।

‘‘उदभव’’ केर अरथ’ हेके कनइ भि भासा केर उतपति, उकर सुरूआति सरूप आर उकर बनेक पर’किरिआ। कनइ भासा केर जनम काहाँ, कबे आर कन परिसतिथि मेंहेन हलक, उकर बनेक मेंहेन कन भासा गिला, समुदाय आर सांसकिरति परंपरा केर जगदान रइ आहे-इ सभे सवाल केर अइधन भासा केर उदभव मेंहेन करल जाएला।

पंचपरगनिया केर संदर्भ मेंहेन इ सवाल टा आर’ बेसि दरकारिक हए जाएला, काहेकि इ भासा टा बहुभासिक आर बहुसांसकिरतिक परिबेस मेंहेन बिकसित हए आहे। एकर उदभव आर बिकास केर लेकहन भिनु-भिनु बिदुआन सउब भिनु-भिनु मत दे आहएं। किछु बिदुआन इके मागधी अपभरंस ले बिकसित मानंएला, किछु इके भोजपुरी चाहे मगही केर रूप कहएंला जबकि कुछ बिदुआन इके आभीरी (अहीरी) परंपरा मेंहेन जड़ेक क’सिस करएंला। किंतु पंचपरगनिया भासा केर बासत’बिक पर’किरति के बुझेक तेहें इ सभे मत केर बेस लेखेर बाचिक जरूरि हेके।


पंचपरगनिया भाषा के उद्भव की पृष्ठभूमि

पंचपरगनिया भाषा का जन्म / उद्भव : सामाइन’ रूपे कन’ भि भासा केर सुरूआत बोली केर रूपे हएला। जखन उ बोली कन’ बड़ समाज केर दारा सइकार कइर लेल जाएला, तखन उकर साहितिक बिकास सुरू हएला आर कालकरम मेंहेन उकर बेआकरनिक सरूप’ बने लागेला। एहे पर’किरिआ उके एकटा आलेदा भासा केर रूपे थापित करेला।

पंचपरगनिया भासा केर संग’उ एहे इसतिथि टा देखातेहे। झारखंड केर पांचपरगना छेतर’ मेंहेन प्राचीन समइ लेके ढेइर जातीय आर भासाइ समुदाए बस’-बास करएंला। हर समुदाए केर आपन-आपन जातिगत भासा संसकिरति, परंपरा आर लकसाहित रहे। इ समुदाए केर माझे हमेसा सामाजिक, आरथिक आर सांसकिरतिक संपर्क’ केर परिनामसरूप एकटा एसन साझा बोली बिकसित हलक, जेटा आघु चइलकहन पंचपरगनिया भासा केर रूप धइर लेलक।

‘‘पंचपरगनिया’’ नाम खुद इ बात टाके संकेत कर’तेहे कि इ भासा टा कन’ जाइत, कन’ समुदाए चाहे कन’ एक भासा केर उपज ना लागे, बलकि ढेइर भासिक आर सांसकिरतिक तत् केर मिसरन ले बनल एकटा बड़े संपरक’ भासा हेके। एहे कारन पंचपरगनिया भासा मेंहेन भिनु-भिनु जातीय भासा आर बाहरी भासा गिला केर लसिंद पुस्ट’ भाभे देखाएला।


डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन का मत

पंचपरगनिया भासा केर संबंध मेंहेन सउबले बेब’सथित टिप्पनी नामजादि भासाबिद् डाॅ. जाॅर्ज अब्राहत ग्रियर्सन जि कइर रहएं। उमने आपन नामकरा गरंथ Linguistic Survey of India मेंहेन पंचपरगनिया के ‘‘पुरबी मगही’’ केर एकटा रूप माइन आहएं। उमन केर अनुजाइ –

‘‘पाँच परगना छेतर’ मेेंहेन क’हाइआ पुरबी मगही के पंचपरगनिया कहल जाएला। चुंकि एकर सउबले बेसि चलन तमाड़ छेतर’ मेंहेन आहे, अहेतेहें इके तमड़ियाउ कहल जाएला।’’

ग्रियर्सन केर इ कथन टा आपन समइए बहुते परभावसाली रहे आर लांबा समइ तक पंचपरगनिया के मगही केर एकटा उपसाखा चाहे रूपभेद केर रूपे देखल जात रहलक।


डॉ. उदय नारायण तिवारी का मत

भोजपुरी भासा केर नामजादि बिदुआन डाॅ. उदय नारायण तिवारी जि उपनउ पंचपरगनिया के भोजपुरी ले संबंध माइन आहएं। उमन केर अनुजाइ-

राँची जिला केर पुरूब बाटे- सिल्ली, बुंडू, सोनाहातु, तमाड़ आर राहे मेंहेन क’हाइआ पंचपरगनिया बासतबे भोजपुरी केर एकटा छेतरीय रूप हेके।

इ कथन टाउ पंचपरगनिया के एकटा आलेदा चिन्हाप आवला भासा केर जाएगाएं एकटा बड़े समुह केर भितरे राखेक असफल परेआस बुझाएला।


ग्रियर्सन एवं उदय नारायण तिवारी के मतों का मूल्यांकन

ग्रियर्सन आर उदय नारायण तिवारी केर मत एतिहासिक नज’इरे महतपुरन’ जरूर हेके, किंतु बरत’मान भासा बइगानिक अइधन इ मत गिलाके पुरन’ रूपे सइकार नाइ करेला।

बासत’बिक रूपे पंचपरगनिया केर भासिक छेतर’ मगही आर भोजपुरी केर मुल भासिक छेतर’ ले भउग’लिक, सांसकिरति आर सामाजिक नज’इरे भिनु आहे। पांचपरगना छेतर’ दखिन छटानागपुर केर पाहाड़ि भाग हेके, जाहाँ केर भउग’लिक संरचना, जनजीबन, लकसंसकिरति, लकगीत, निरित, परब-तिहार आर सामाजिक परंपरा उतर बिहार केर मगही आर भोजपुरी छेतर’ ले एकदमे अलग आहे।

एकर अलावा पंचपरगनिया भासा मेंहेन बांगला, उड़िया आर हिंआक जनजातीय भासा गिलाक लसिंद पुस्ट’ भाभे देखाएला। एकर धउनि संरचना, सबदावली आर लकसाहित’ आलेदा चिन्हाप राखेला। अहेतेहें पंचपरगनिया के किबल मगही चाहे भोजपुरी केर रूपभेद मानना उचित नि बुझाएला।


नलिन मोहन सन्याल का मत

नलिन मोहन सन्याल जि मागधी अपभरंस ले बिकसित भासा गिला के तिन भागे बांइट आहएं-

  • पुरबी मागधी – बांगला, असमिया आर उड़िया
  • केन्द्रीय मागधी – मगही आर मैथिली
  • पछिमि मागधी – भोजपुरी आर छटानागपुर केर बोलि गिला

इ नज’इरे छटानगपुर छेतर’ केर भासा गिलाकेर बिकास मागधी अपभरंस परंपरा ले जुड़ल मानल जाए पाराए। इ मत टा पंचपरगनिया केर बिकास मेंहेन मागधी अपभरंस केर भुमिका के सइकार करेला, किंतु संगे-संगे छेतरिअ बिसेसता केर महत कउ रेखांकित करेला।


डॉ. करम चन्द्र अहीर का मत

डाॅ. करम चन्द्र अहीर जि पंचपरगनिया भासा केर उदभव (पंचपरगनिया भाषा का जन्म / उद्भव) आभीरी (अहीरी) भासा आर संसकिरिति ले जड़ेक परेआस कइर आहएं। उमन केर अनुजाइ अहीर समुदाय जखन पांचपरगना छेतर’ मेंहेन आलएं, तखन उमन आपन संगे आभीरी भासा, संसकिरिति आर साहित’ लेकहन आलएं। कालांतर मेंहेन एहे भासा टाइ हिंआक इसथानिअ सामाज के बेस बुझाएक तेहें आपनालएं आर पंचपरगनिया केर रूपे बिकसित हलक।

उमन इटाउ मानएंला कि पंचपरगनिया केर एकटा पुरना नाम ‘‘खेरवारी’’ रहे, जेटा बादे तमड़िया आर आखिरे पंचपरगनिया नाम ले आपन चिन्हाप बनालक।

डाॅ. अहीर जि केर कथन पंचपरगनिया भासा केर बिकास मेंहेन अहीर समुदाए केर जगदान के रेखांकित कर’एंला, किंतु इटाके पंचपरगनिया केर एकमातर’ जरका मानना कठिन बुझातेहे।

पांचपरगना छेतर’ मेंहेन अहीर समुदाए केर अलावा मुंडा, उराँव, महली, लोहरा, कुड़मी, बिरहोर आर आर’ अइन’ समुदाए केर लग’ बहुत लांबा समइ ले हिंआ बस’-बास करते आए आहएं। एहे सभे समुदाए केर भासा आर संसकिरति गिलाउ पंचपरगनिया केर बिकास मेंहेन जगदान आहे। अहेतेहें पंचपरगनिया के किबल आभीरी भासा ले उदभव हए आहे मानना भासिक बासत’बिकता के पुरन’ रूपे पुस्ट’ नि करेला।

हए पारे अहीरी भासा केर लसिंद पंचपरगनिया मेंहेन अब’इस’ हए आहे, किंतु पंचपरगनिया केर सरूप इटालउ बेसि बेआपक आर बहुआयामी आहे।


पंचपरगनिया भाषा के उद्भव का समन्वयवादी दृष्टिकोण

एखन तक केर ख’ज मेंहेन पावाल भासिक, एइतिहासिक आर सांसकिरितिक परमान केर आधारे इटा कहल जाए पाराए कि पंचपरगनिया भासा केर उद्भव कन’ एक भासा चाहे एक जाइत बिसेस ले नि हए आहे। इ भासा टा पांचपरगना छेतर’ मेंहेन बस’-बास कर’इआ भिनु-भिनु समुदाए केर भासा, लकसंसकिरिति आर सामाजिक संपरक’ केर बहुत लांबा समइ केर समनब’ए केर परिनाम हेके।

मागधी अपभरंस केर परंपरा, इसथानिअ जातीय भासा गिलाक लसिंद, बांगला आर उड़िया जेसन पासेक भासा केर संपरक’, आर इ छेतर’ केर भिनु काएदाक सांसकिरतिक परिसतिथि इ सभे गिला मिलकहन पंचपरगनिया भासा केर बनेक आर बिकास मेंहेन नामजादि जगदान रइ आहे।


निष्कर्ष

पंचपरगनिया भाषा का जन्म / उद्भव : पंचपरगनिया भासा केर उदभव एकटा जटिल आर बहुआयामी एतिहासिक पर’किरआ केर परिनाम हेके। इके ना त’ किबल मगही, भोजपुरी चाहे आभीरी भासा केर रूप कहल जाए पाराए आर ना कन’ जाति समुदाए बिसेस केर भासा मानल जाए पाराए। इ भासा टा पांचपरगना छेतर’ केर बहुभासिक आर बहुसांसकिरितिक परंपरा ले उपजल भासा हेके।

जइदपि पंचपरगनिया मेंहेन भारतीय आर्य भासा, बिसेस कइर कहन मागधी अपभरंस परंपरा केर पुस्ट’ छाप देखाएला, फिर भि एकर आपन भिनु रकमेक धउनिगत, सबद’गत, बेआकरनिक आर सांसकिरितिक बिसेसता आहे। एहे बिसेसता गिलाइ पंचपरगनिया भासा के एकटा आलेदा भासिक चिन्हाप देला।

इ रकम पंचपरगनिया भासा के एकटा समनब’एबादी, बेजाइन जरका (स’त) आवला आर एकटा आलेदा भासिक इकाइ केर रूपे देखनाटा बेसि जुकतिसंगत आर बइगानिक बुझाएला।

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✅ FAQ Section पंचपरगनिया भाषा का जन्म / उद्भव

पंचपरगनिया भाषा का उद्भव कैसे हुआ?

पंचपरगनिया भाषा का जन्म / उद्भव पंचपरगना क्षेत्र में विभिन्न भाषाओं, जातीय समुदायों और सांस्कृतिक परंपराओं के दीर्घकालीन संपर्क एवं समन्वय से हुआ माना जाता है।


पंचपरगनिया भाषा किस भाषा परिवार से संबंधित है?

पंचपरगनिया भाषा भारतीय आर्य भाषा परिवार की पूर्वी आर्य शाखा से संबंधित मानी जाती है।


क्या पंचपरगनिया भाषा मागधी अपभ्रंश से विकसित हुई है?

अनेक विद्वान पंचपरगनिया भाषा को मागधी अपभ्रंश परंपरा से विकसित मानते हैं, हालांकि इसके विकास में स्थानीय जातीय भाषाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।


डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन ने पंचपरगनिया भाषा के बारे में क्या कहा है?

डॉ. ग्रियर्सन ने पंचपरगनिया को पूर्वी मगही का एक रूप माना था तथा इसे तमाड़ क्षेत्र में अधिक प्रचलित होने के कारण “तमड़िया” भी कहा था।


क्या पंचपरगनिया भाषा भोजपुरी की बोली है?

कुछ विद्वानों ने इसे भोजपुरी से संबद्ध माना है, किंतु आधुनिक भाषावैज्ञानिक अध्ययन पंचपरगनिया को स्वतंत्र भाषिक पहचान वाली भाषा के रूप में देखने लगे हैं।


पंचपरगनिया भाषा के विकास में किन भाषाओं का प्रभाव है?

पंचपरगनिया भाषा पर मागधी अपभ्रंश, बंगला, उड़िया, नागपुरी तथा विभिन्न स्थानीय जातीय भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है।


पंचपरगनिया भाषा को स्वतंत्र भाषा क्यों माना जाता है?

इसकी अपनी विशिष्ट ध्वनिगत, शब्दगत, व्याकरणिक तथा सांस्कृतिक विशेषताएँ हैं, जो इसे अन्य भाषाओं से अलग पहचान प्रदान करती हैं।



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